हिमाचल प्रदेश के 158 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में सेवारत शिक्षकों की तैनाती को लेकर सरकार के सामने नया प्रशासनिक पेच खड़ा हो गया है। शनिवार को कैबिनेट बैठक में इन स्कूलों के लिए सेवारत शिक्षकों की मेरिट आधार पर नियुक्ति का मामला चर्चा के केंद्र में रहा। मंत्रियों ने शिक्षा सचिव की ओर से दी गई प्रस्तुति का विरोध करते हुए विभिन्न सुझाव और आपत्तियां दीं।
इसके बाद सरकार ने अंतिम निर्णय फिलहाल टालते हुए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को भी शामिल किया है। कमेटी तय करेगी कि सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले सरकारी स्कूलों में किन शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
बैठक के दौरान मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया को लेकर कई व्यावहारिक और सेवा संबंधी सवाल उठाए गए, जिस कारण मामला कमेटी को सौंपा गया। चर्चा हुई कि प्रदेश में सीबीएसई शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सरकार पहले ही इन स्कूलों के लिए शिक्षकों की नियमित भर्ती का भरोसा दे चुकी है। राज्य में सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले स्कूलों की संख्या बढ़ाने और आवश्यक स्टाफ उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
सरकार चाहती है कि सीबीएसई स्कूलों में ऐसे शिक्षक तैनात हों, जो आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, अंग्रेजी माध्यम और सीबीएसई पैटर्न की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर परिणाम दे सकें। हालांकि बीते दिनों इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए ली गई परीक्षा और तैयार मेरिट का पूरा मामला अब नए सिरे से सुलझाया जाएगा। उधर, कैबिनेट ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
राज्य चयन आयोग को भी शिक्षकों की सीधी भर्ती से संबंधित प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने को कहा गया है। उधर, सरकार की ओर से गठित कमेटी की सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगी या इसके लिए कोई मिश्रित व्यवस्था अपनाई जाएगी। फिलहाल प्रदेश के शिक्षकों की नजरें इस कमेटी की रिपोर्ट पर टिक गई हैं।