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हिमाचल हाईकोर्ट: 11 साल में बढ़ी महंगाई, पति को पत्नी को अब देना होगा 20 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता

मुख्य तथ्य हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए पत्नी और बच्चों के गुजारा भत्ते (मेंटेनेंस) की राशि को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति…

मुख्य तथ्य

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए पत्नी और बच्चों के गुजारा भत्ते (मेंटेनेंस) की राशि को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि समय के साथ बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह बढ़ोतरी पूरी तरह से जायज है।

पूरा मामला

वर्ष 2010 में फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी के लिए 2,000 रुपये और दोनों बच्चों के लिए 1,500-1,500 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। अगस्त 2021 में पत्नी ने बढ़ती महंगाई और बच्चों की शिक्षा के खर्च के मद्देनजर गुजारा भत्ता बढ़ाने का आवेदन किया। फैमिली कोर्ट ने कुल राशि बढ़ाकर 20,000 रुपये (पत्नी के लिए 10,000 और प्रत्येक बच्चे के लिए 5,000 रुपये) कर दी। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।

अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि 11 वर्षों में वस्तुओं की कीमतों और बच्चों की पढ़ाई के खर्च में काफी वृद्धि हुई है, इसलिए कुल राशि को 20,000 रुपये करना न तो अत्यधिक है और न ही गलत। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 125 सीआरपीसी के तहत पिछले मुकदमे में यह तय हो चुका था कि पत्नी के पास अलग रहने का वैध कारण है, और पति ने इसे स्वीकार किया था। इसलिए धारा 127 (गुजारा भत्ते में बदलाव) की कार्यवाही में पति दोबारा इन पुरानी बातों को आधार बनाकर मेंटेनेंस बढ़ाने का विरोध नहीं कर सकता।

पति की दलीलें खारिज

पति ने दलील दी थी कि उसकी तनख्वाह 44,000 रुपये है और उसे अपनी बूढ़ी मां को 4,000 रुपये देने होते हैं, इसलिए वह 20,000 रुपये नहीं दे सकता। हालांकि, जिरह के दौरान यह सामने आया कि उसके पिता एक सेवानिवृत्त सेना कर्मी हैं और उन्हें अच्छी पेंशन मिलती है। अदालत ने माना कि पति के पास मेंटेनेंस का विरोध करने का कोई ठोस आधार या दस्तावेज नहीं है। पति ने यह भी दलील दी कि भविष्य में रिटायरमेंट के बाद उसकी आय कम हो जाएगी, इसलिए कोर्ट अभी से मेंटेनेंस की राशि घटा दे। अदालत ने कहा कि यह दलील फैमिली कोर्ट के सामने नहीं रखी गई थी, और यदि भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं तो पति नया आवेदन कर सकता है, लेकिन इस आधार पर मौजूदा आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • यह फैसला दर्शाता है कि अदालतें महंगाई और बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गुजारा भत्ता बढ़ा सकती हैं।
  • पति-पत्नी के बीच पहले से तय तथ्यों को बार-बार नहीं उठाया जा सकता।
  • यदि भविष्य में आय में कमी आती है तो पति नया आवेदन कर सकता है, लेकिन मौजूदा आदेश को चुनौती नहीं दे सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हिमाचल हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता कितना बढ़ाया?

हाईकोर्ट ने पत्नी और बच्चों के गुजारा भत्ते को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

गुजारा भत्ता बढ़ाने का कारण क्या था?

अदालत ने 11 वर्षों में बढ़ी महंगाई और बच्चों की शिक्षा के खर्च को देखते हुए यह बढ़ोतरी जायज ठहराई।

पति ने गुजारा भत्ता बढ़ाने का विरोध क्यों किया?

पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी बिना वजह अलग रह रही है और उसकी आय 44,000 रुपये है, जिसमें से वह 20,000 रुपये नहीं दे सकता। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

क्या पति भविष्य में गुजारा भत्ता कम करवा सकता है?

हां, यदि भविष्य में उसकी आय कम होती है तो वह नया आवेदन कर सकता है, लेकिन इस आधार पर मौजूदा आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता।

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