मुख्य तथ्य
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई 2026) को दिल्ली पुलिस से एक वकील पर हुए हमले की स्थिति रिपोर्ट मांगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुलिस को वकील को जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।
पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने अदालत में घायल वकील पंकज शर्मा की तस्वीरें पेश कीं। उन्होंने कहा, 'अगर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकील के साथ ऐसा हो सकता है, तो देश का एक आम नागरिक कितना सुरक्षित है?'
महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी ने कहा कि यह घटना गंभीर चिंता पैदा करती है। वकील पंकज शर्मा ने दिल्ली पुलिस पर निष्क्रियता और कर्तव्य में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को उन पर हमला हुआ, जिसमें सिर पर गंभीर चोटें आईं।
पुलिस पर आरोप
याचिका में कहा गया, 'दिल्ली पुलिस आरोपी के प्रभाव में है, जो एक स्थानीय नेता के करीबी है। वह न तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर रही है और न ही याचिकाकर्ता को सुरक्षा प्रदान कर रही है। 12 जुलाई को आरोपियों ने फिर से याचिकाकर्ता और उसके परिवार पर हमला करने का प्रयास किया।'
विकास सिंह ने कहा कि पुलिस ने शुरू में एफआईआर दर्ज नहीं की। बाद में दबाव में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें 'साधारण हमला' जैसे मामूली आरोप लगाए गए, जबकि पीड़ित को जानलेवा चोटें आई थीं।
अदालत का रुख
अदालत ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट उपायुक्त पुलिस से कम रैंक के अधिकारी द्वारा दाखिल नहीं की जानी चाहिए। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई तय की है।
FAQ
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से क्या मांगा?
सुप्रीम कोर्ट ने वकील पंकज शर्मा पर हमले के मामले में दिल्ली पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
वकील पर हमला कब हुआ?
पहला हमला 11 जुलाई 2026 को हुआ, जिसमें वकील के सिर पर गंभीर चोटें आईं। दूसरा प्रयास 12 जुलाई को हुआ।
अगली सुनवाई कब है?
अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी।
वकील पर हमले की शिकायत में क्या आरोप हैं?
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी एक स्थानीय नेता के करीबी हैं और पुलिस उनके प्रभाव में कार्रवाई नहीं कर रही।