प्रमुख तथ्य
कुल्लू जिले में देवी-देवताओं की तीर्थ यात्राओं का दौर जारी है। इसी क्रम में कोठी जलोड़ीगढ़ के अधिष्ठाता देवता कोट पझारी सरयोलसर झील की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। यहां वे 15 जुलाई को शाही स्नान करेंगे और विशेष पूजा-अर्चना होगी।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
देवता का रथ रविवार, 12 जुलाई को अपने देवालय से निकला और शाम तक खनाग गांव पहुंचा। ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। 13 जुलाई को देवता खनाग से डगसारी की ओर प्रस्थान करेंगे। 14 जुलाई को वे 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित माता बूढ़ी नागिन के वास स्थल सरयोलसर पहुंचेंगे। 15 जुलाई की सुबह पूजा-अर्चना के बाद देवता पवित्र स्नान करेंगे।
धार्मिक महत्व और आयोजन
सरयोलसर झील क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक स्थलियों में से एक है, जहां माता बूढ़ी नागिन की पूजा होती है। देवता कोट पझारी का यहां आना स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बड़ा आयोजन है। कारदार भागे राम राणा ने सभी कारकूनों, हारियानों और देवलुओं से इस धार्मिक यात्रा में भाग लेने की अपील की है।
श्रद्धालुओं के लिए सूचना
- यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु 14 जुलाई को सरयोलसर पहुंच सकते हैं।
- 15 जुलाई की सुबह पूजा में भाग लेने के लिए समय पर पहुंचना आवश्यक है।
- उच्च ऊंचाई पर ठंड को देखते हुए गर्म कपड़े साथ रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देव कोट पझारी कहां से निकले हैं?
देवता कोठी जलोड़ीगढ़ के अधिष्ठाता हैं और अपने देवालय से रवाना हुए हैं।
सरयोलसर झील कितनी ऊंचाई पर स्थित है?
सरयोलसर झील 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और माता बूढ़ी नागिन का वास स्थल मानी जाती है।
देवता की यात्रा का कार्यक्रम क्या है?
12 जुलाई को देवता खनाग गांव पहुंचे, 13 जुलाई को डगसारी जाएंगे, 14 जुलाई को सरयोलसर पहुंचेंगे और 15 जुलाई को स्नान व पूजा होगी।