पिता के संघर्ष को तस्वीरों में उकेरा
लाहौल-स्पीति जिले की पट्टन घाटी के ठोलंग गांव के श्याम आजाद ने अपने 77 वर्षीय पिता सुखदयाल सेन के जीवन संघर्ष, अथक परिश्रम और बुनकर कला के प्रति समर्पण को एक विशेष फोटो गैलरी के माध्यम से संजोया है। यह गैलरी न केवल तस्वीरों का संग्रह है, बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का जीवंत दस्तावेज है।
उपायुक्त ने की गैलरी की सराहना
रविवार को इस फोटो गैलरी का उद्घाटन लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने किया। उन्होंने गैलरी का अवलोकन करते हुए इसे परिवार, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सहेजने वाला अत्यंत प्रेरणादायक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल समाज को प्रेरित करती है।
77 वर्षों का बुनकर जीवन
सुखदयाल सेन पिछले 77 वर्षों से बुनकर के रूप में कार्य कर रहे हैं और आज भी उसी जोश के साथ अपने काम में लगे हुए हैं। उनकी कला और मेहनत ने परिवार और समाज में एक मिसाल कायम की है।
समारोह में गणमान्य लोग शामिल
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सुरेश कुमार, पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष संसार चंद शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने श्याम आजाद के इस प्रयास की सराहना की।
फोटो गैलरी का महत्व
यह गैलरी न केवल एक बेटे के पिता के प्रति प्रेम को दर्शाती है, बल्कि पारंपरिक बुनकर कला के संरक्षण और सम्मान का भी प्रतीक है। ऐसी पहल युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और माता-पिता के योगदान को पहचानने की प्रेरणा देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
यह फोटो गैलरी किसने तैयार की?
लाहौल-स्पीति के ठोलंग गांव के श्याम आजाद ने अपने पिता सुखदयाल सेन के संघर्ष को दर्शाने के लिए यह गैलरी तैयार की।
सुखदयाल सेन कितने वर्षों से बुनकर हैं?
सुखदयाल सेन पिछले 77 वर्षों से बुनकर के रूप में कार्यरत हैं।
गैलरी का उद्घाटन किसने किया?
लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने रविवार को इस फोटो गैलरी का उद्घाटन किया।