परिचय
1985 में NBC पर शुरू हुआ सिटकॉम 'Valerie' वैलेरी हार्पर के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यह शो एक उपनगरीय व्यवसायी महिला की कहानी थी, जो अपने तीन बेटों (जिनमें से एक जेसन बेटमैन ने निभाया) की परवरिश करती है जबकि उसका पायलट पति अक्सर दूर रहता है। हालांकि, यह शो जल्द ही विवादों में घिर गया जब हार्पर को उनके ही शो से निकाल दिया गया और उनके कैरेक्टर को मार दिया गया।
शो की शुरुआत और विवाद की जड़
'Valerie' शुरू में कम रेटिंग्स के साथ आया था, लेकिन सीजन 2 के अंत तक इसने एक वफादार दर्शक वर्ग बना लिया। जब हार्पर ने सैलरी बढ़ाने और शो पर अधिक रचनात्मक नियंत्रण की मांग की, तो प्रोडक्शन कंपनी लॉरिमर-टेलीपिक्चर्स ने इसे नकार दिया। बातचीत विफल होने पर हार्पर ने एक एपिसोड की शूटिंग से इनकार कर दिया, जैसा उन्होंने पहले 'रोडा' पर भी किया था। लेकिन इस बार NBC ने उन्हें मौका नहीं दिया। अगले हफ्ते जब वह सेट पर पहुंचीं, तो उन्हें फायर कर दिया गया।
कैरेक्टर की मौत और शो का नाम बदलना
हार्पर की फायरिंग के बाद, शो के राइटर्स ने उनके कैरेक्टर वैलेरी होगन को ऑफ-स्क्रीन मार दिया। उनकी जगह सैंडी डंकन द्वारा निभाई गई भाभी सैंडी होगन ने परिवार की देखभाल संभाली। शो का नाम पहले 'Valerie's Family' और फिर 'The Hogan Family' रखा गया।
कानूनी लड़ाई और ऐतिहासिक जीत
NBC ने हार्पर के खिलाफ $70 मिलियन का मुकदमा दायर किया, जिसमें अनुबंध भंग का आरोप लगाया गया। हार्पर और उनके पति टोनी कैसिओटी (जो शो के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थे) ने $180 मिलियन का काउंटरसूट दायर किया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, जूरी ने हार्पर के पक्ष में फैसला सुनाया कि उन्हें गलत तरीके से निकाला गया। उन्हें $1.4 मिलियन का मुआवजा और शो के मुनाफे का 12.5% हिस्सा मिला।
हार्पर का बयान और प्रभाव
हार्पर ने लॉस एंजिल्स टाइम्स को बताया, 'मेरे बारे में बहुत सारी आधी-अधूरी सच्चाइयाँ और सरासर झूठ थे—मेरे प्रदर्शन, मेरी स्थिरता, मेरी मानसिक स्थिति के बारे में। यह देखना बहुत अच्छा है कि 'गलत तरीके से निकाला गया' लिखा है, जबकि मैंने सिर्फ 'निकाला गया, निकाला गया, निकाला गया' देखा था।' इस जीत ने उनकी प्रतिष्ठा को बहाल किया और वह आगे चलकर 'मेलरोज़ प्लेस', 'सेक्स एंड द सिटी' और 'डांसिंग विद द स्टार्स' जैसे शो में नजर आईं।
निष्कर्ष
वैलेरी हार्पर की कहानी हॉलीवुड में अभिनेताओं के अधिकारों की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उनकी कानूनी जीत ने यह साबित किया कि स्टूडियो की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है। 80 वर्ष की आयु में कैंसर से उनकी मृत्यु के बाद भी, यह मामला मीडिया और कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर बना हुआ है।