मुख्य तथ्य
कुल्लू जिले के उपमंडल बंजार की पांच कोठी के आराध्य देवता श्रृंगा ऋषि 24 वर्षों के अंतराल के बाद धार्मिक स्थल हामटा की पवित्र यात्रा पर निकले हैं। यह यात्रा 125 किलोमीटर लंबी है, जो पूरी तरह पैदल तय की जा रही है। रविवार (12 जुलाई 2026) को देवता प्रीणी गांव पहुंचेंगे, जहां जमलू देवता के साथ ऐतिहासिक देव मिलन होगा। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
यात्रा का विवरण
शनिवार (11 जुलाई) को देवता श्रृंगा ऋषि सैकड़ों हारियानों और कारकूनों के साथ ऊझी घाटी के जगतसुख स्थित गायत्री मंदिर से दोपहर बाद बाहणू के लिए रवाना हुए। इससे पहले शुक्रवार को जगतसुख में ऋषि का माता संध्या गायत्री के साथ मिलन हुआ था। देर शाम देवता बाहणू गांव पहुंचे, जहां एक श्रद्धालु के घर में रात्रि विश्राम किया। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से देवता का स्वागत किया।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
देवता श्रृंगा ऋषि के कारदार देवेंद्र कुमार और पुजारी चानन सिंह शर्मा के अनुसार, यह यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 24 वर्षों के बाद हो रही इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण है। रविवार को देवता प्रीणी गांव स्थित प्राचीन जमलू देवता मंदिर पहुंचेंगे, जहां दोनों देवताओं का भव्य मिलन होगा।
श्रद्धालुओं के लिए सूचना
- यात्रा मार्ग: जगतसुख → बाहणू → प्रीणी → हामटा
- दूरी: 125 किलोमीटर (पैदल)
- मुख्य कार्यक्रम: रविवार को प्रीणी में देव मिलन
- अनुमानित श्रद्धालु: हजारों की संख्या
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देवता श्रृंगा ऋषि की हामटा यात्रा कितने वर्ष बाद हो रही है?
यह यात्रा 24 वर्षों बाद हो रही है।
देवता श्रृंगा ऋषि कहां से कहां तक यात्रा करेंगे?
देवता जगतसुख से प्रीणी तक 125 किलोमीटर की पैदल यात्रा करेंगे।
प्रीणी में किस देवता से मिलन होगा?
प्रीणी में जमलू देवता से भव्य देव मिलन होगा।