मामले की पृष्ठभूमि
शिमला की सत्र अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी महिला को बरी कर दिया। सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने यह आदेश आरोपी और शिकायतकर्ता कंपनी के बीच समझौते के बाद जारी किया। आरोपी सीमा कुमारी और श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के बीच हुए इस समझौते के चलते निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया गया।
निचली अदालत का फैसला
निचली अदालत ने 26 मई 2025 को आरोपी सीमा कुमारी को दोषी करार दिया था। इसके बाद 27 मई 2025 को उन्हें एक साल के साधारण कारावास और 7.86 लाख रुपये के मुआवजे की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ सीमा कुमारी ने शिमला सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
समझौता और सत्र अदालत का आदेश
अपील की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत समझौते के लिए आवेदन दाखिल किया। अदालत को बताया गया कि सीमा कुमारी ने चेक की पूरी राशि कंपनी को चुका दी है। इसके बाद सत्र अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समझौते को स्वीकार करते हुए निचली अदालत की सजा रद्द कर दी और आरोपी को बरी कर दिया।
क्या है कानूनी प्रावधान?
परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत चेक बाउंस के मामलों में अदालत पक्षों के बीच समझौते को मंजूरी दे सकती है। यह प्रावधान विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देता है और पीड़ित पक्ष को मुआवजा दिलाने में मदद करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चेक बाउंस मामले में आरोपी को क्यों बरी किया गया?
आरोपी और शिकायतकर्ता कंपनी के बीच समझौता हो गया, जिसके बाद सत्र अदालत ने निचली अदालत की सजा रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया।
निचली अदालत ने क्या सजा सुनाई थी?
निचली अदालत ने 26 मई 2025 को आरोपी को दोषी करार देते हुए 27 मई 2025 को एक साल का साधारण कारावास और 7.86 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी।
समझौता किस कानूनी प्रावधान के तहत हुआ?
समझौता परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत किया गया।
आरोपी ने कंपनी को कितनी राशि का भुगतान किया?
आरोपी सीमा कुमारी ने चेक की पूरी राशि 7.86 लाख रुपये का भुगतान श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी को कर दिया।