प्रमुख तथ्य
21 जून को तमिलनाडु के तिरुवल्लुर में एक सीफूड प्रोसेसिंग प्लांट में अमोनिया गैस रिसाव से 17 मजदूरों की मौत हो गई, जिनमें से 14 ओडिशा के जुआंग समुदाय की बालिकाएं थीं। ये सभी 18 वर्ष से कम आयु की थीं और अपने परिवारों की आर्थिक मदद के लिए काम करने गई थीं।
घटना का विवरण
गैस रिसाव रात में मजदूरों के आवास के पास हुआ, जब वे सो रहे थे। प्रारंभिक जांच में पता चला कि ठेकेदारों ने जुआंग समुदाय की लड़कियों को नियमित आय और अग्रिम भुगतान का लालच देकर भर्ती किया था। 27 जून को तीन बहनें सारी, सस्मिता और रत्नी अपने गांव कोडिपासा लौटीं, जहां उनके दोस्तों का अंतिम संस्कार हो चुका था।
जुआंग समुदाय की स्थिति
जुआंग समुदाय ओडिशा के केओनझार, अंगुल और ढेंकनाल जिलों की पहाड़ियों में बसे बिखरे हुए गांवों में रहता है। ये लोग झूम खेती और वन उपज पर निर्भर हैं। कोडिपासा गांव की महिलाएं और लड़कियां पहले पलायन नहीं करती थीं, लेकिन अब गरीबी ने उन्हें मजबूर कर दिया है। एक गांव से कम से कम 20 लड़कियां तमिलनाडु गई थीं, जिनमें से तीन अभी भी अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं।
गरीबी और पलायन की मजबूरी
सारी जुआंग ने बताया, 'हम चार बहनें और दो भाई हैं। पिता की मृत्यु हो गई। मां जो कमाती हैं, वह हम सबके लिए पर्याप्त नहीं है। सब्सिडी वाले चावल के अलावा हमारे पास कुछ नहीं है।' उन्होंने बताया कि वे एक अच्छा घर बनाने के लिए तमिलनाडु गई थीं। वहीं, बसंग जुआंग ने बताया कि उनकी बेटी फुलमणि ने 9,000 रुपये भेजे थे, जिससे उन्होंने टिन की छत डलवाई। फुलमणि की भी गैस रिसाव में मौत हो गई।
सरकारी योजनाओं की विफलता
जुआंग विकास एजेंसी (JDA) की स्थापना 1978 में हुई थी, लेकिन पांच दशक बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, JDA के गांवों में साक्षरता दर मात्र 38.18% है। अधिकांश बच्चे दसवीं के बाद पलायन कर जाते हैं। गांव की बुजुर्ग सैबानी जुआंगा ने कहा, 'हमारे पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं है। निर्माण कार्य शारीरिक रूप से कठिन है, मजदूरी कम और अनियमित है, और पलायन ही एकमात्र विकल्प है।'
सरकारी प्रयास और चुनौतियां
ओडिशा में 13 PVTG समुदाय हैं, जिनके विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। PM-JANMAN मिशन के तहत 24,104 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लेकिन CAG की रिपोर्ट बताती है कि MGNREGS के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में से केवल 45% ही शुरू हो पाई हैं। 174.15 करोड़ रुपये अप्रयुक्त पड़े हैं, जिनमें से 115.02 करोड़ रुपये मजदूरी के लिए थे।
अन्य PVTG समुदायों की स्थिति
मलकानगिरी जिले के बोंडा समुदाय के नंदा सीसा ने बताया कि कोविड के बाद युवाओं का पलायन बढ़ गया है। 16 वर्ष की आयु के बाद वे जल्दी पैसा कमाने के लिए बाहर जाने लगते हैं।
निष्कर्ष
जुआंग बालिकाओं की मौत ने आदिवासी समुदायों की दयनीय स्थिति को उजागर किया है। सरकारी योजनाओं के बावजूद, गरीबी और शिक्षा की कमी के कारण पलायन मजबूरी बना हुआ है। इन समुदायों के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमोनिया गैस लीक की घटना कहां हुई?
यह घटना तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में एक सीफूड प्रोसेसिंग प्लांट में 21 जून को हुई।
मरने वाली जुआंग बालिकाओं की संख्या कितनी है?
इस हादसे में 14 जुआंग समुदाय की बालिकाओं सहित कुल 17 मजदूरों की मौत हुई।
जुआंग समुदाय को PVTG क्यों माना जाता है?
जुआंग समुदाय को अत्यधिक संवेदनशील जनजाति समूह (PVTG) इसलिए माना जाता है क्योंकि इनकी साक्षरता दर बहुत कम है और ये आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।
सरकार ने पीड़ित परिवारों को क्या मुआवजा दिया?
ओडिशा सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।