परियोजना की स्थिति
कुल्लू जिले के बजौरा में मल्टी स्पेशलिटी आयुष अस्पताल का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है। 10.35 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अस्पताल का भवन 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से कोई मरम्मत या निर्माण नहीं हुआ। ब्यास नदी के किनारे स्थित यह भवन बाढ़ की चपेट में आने से एक तरफ झुक गया है।
परियोजना का इतिहास
इस अस्पताल की आधारशिला 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रखी थी। यहां 50 बिस्तरों वाली मल्टी स्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना थी, जिसमें केरल की तर्ज पर पंचकर्म पद्धति से इलाज भी शामिल है। 2023 और 2025 में ब्यास नदी में आई बाढ़ ने भवन को और अधिक नुकसान पहुंचाया।
प्रभावित क्षेत्र और लाभ
अस्पताल के पूरा होने पर कुल्लू जिले के साथ-साथ मंडी, लाहौल और पांगी के लोगों को भी आयुर्वेदिक उपचार की सुविधा मिलने वाली थी। परिसर में हर्बल गार्डन बनाने की भी योजना है।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों जगदीश ठाकुर, पुरुषोतम शर्मा, हीरा लाल, मान सिंह, निका राम और दलीप सिंह ने कहा कि अस्पताल जल्द बनना चाहिए। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर एवं भाजपा नेता खुशाल ठाकुर ने कहा, 'सरकार को गंभीरता से इस पर काम करना चाहिए।' भाजयुमो के प्रदेश सचिव रूचिन चौहान ने कहा, 'मल्टी स्पेशलिटी आयुष अस्पताल का निर्माण ठप होना सरकार की नाकामी है। लोगों को इस अस्पताल का पूरा होने का बेसब्री से इंतजार है।'
FAQ
बजौरा आयुष अस्पताल पर कितना खर्च हुआ है?
अब तक लगभग 10.35 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
अस्पताल का निर्माण क्यों ठप है?
जुलाई 2023 की आपदा में भवन क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से कार्य रुका हुआ है।
अस्पताल बनने से किन क्षेत्रों को लाभ होगा?
कुल्लू, मंडी, लाहौल और पांगी के लोगों को 50 बिस्तरों वाली मल्टी स्पेशलिटी सुविधाएं मिलेंगी।