बेंगलुरु में सुरक्षित फुटपाथ अभियान: सड़क विक्रेताओं की बेदखली पर विवाद
बेंगलुरु में चल रहे 'सुरक्षित फुटपाथ अभियान' ने सड़क विक्रेताओं और प्रशासन के बीच टकराव पैदा कर दिया है। इस अभियान के तहत फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सैकड़ों सड़क विक्रेताओं को बेदखल किया जा रहा है और उनका सामान जब्त किया जा रहा है। विक्रेता इसे अवैध बता रहे हैं और 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बेंगलुरु के मल्लेश्वरम 8वें क्रॉस पर पिछले 15 सालों से आभूषण और एक्सेसरीज बेचने वाले राजू के.एम. को पिछले सप्ताह बेदखल कर दिया गया। उन्होंने कहा, "वे हमें अतिक्रमणकारी कहते हैं। हमें अपने सामान को जब्त होने से बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। अब हम छोटी आंतरिक सड़कों पर चोरों की तरह डरते हुए व्यापार कर रहे हैं।"
विजयनगर, केंगेरी, आर.आर. नगर और एन.आर. कॉलोनी जैसे इलाकों में बेदखली के खिलाफ जोरदार विरोध हुआ। विजयनगर में 1999 से विक्रेता एस. बाबू, जो कर्नाटक प्रगतिपारा बीड़ी व्यापारिगल संघ के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि नगर निगम के अधिकारियों ने दो दिनों तक उन्हें बेदखल करने की कोशिश की, लेकिन विरोध के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा, "मेरे पास पुराने सर्वेक्षण का आईडी कार्ड है। मैं नए सर्वेक्षण में पंजीकृत हूं, लेकिन अभी तक आईडी कार्ड नहीं दिए गए। फिर भी वे हमें अतिक्रमणकारी कहते हैं।"
प्रशासन का रुख
ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने घोषणा की कि शहर की कम से कम 1,500 किमी मुख्य और उप-मुख्य सड़कों (लगभग 10%) को 'नो वेंडिंग जोन' घोषित किया जाएगा। उन्होंने अभियान का बचाव करते हुए कहा कि विक्रेताओं को केवल आंतरिक सड़कों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
विक्रेताओं के आरोप
सड़क विक्रेता संघों ने चार प्रमुख उल्लंघनों की ओर इशारा किया है:
- सर्वेक्षण पूरा होने से पहले बेदखली: 2014 के कानून के अनुसार, जब तक सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता और विक्रेताओं को आईडी कार्ड नहीं दे दिए जाते, तब तक किसी भी विक्रेता को बेदखल नहीं किया जा सकता। 2024 के सर्वेक्षण में केवल 34,000 विक्रेता पंजीकृत हुए, जबकि पीएम स्वनिधि योजना के तहत 80,000 से अधिक विक्रेताओं ने ऋण लिया है। संघों का आरोप है कि सर्वेक्षण में जानबूझकर कम संख्या दिखाई गई।
- गैर-कानूनी घोषणा: कानून के अनुसार, केवल टाउन वेंडिंग कमेटियां ही नो वेंडिंग जोन घोषित कर सकती हैं, जिनमें विक्रेताओं के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इन कमेटियों का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया और नई कमेटियां नहीं बनीं। संघों ने सवाल उठाया कि मंत्री अकेले कैसे नो वेंडिंग जोन घोषित कर सकते हैं।
- बिना नोटिस के बेदखली: विक्रेताओं को बेदखली से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और जब्त किए गए सामान का ब्यौरा लिखित में नहीं दिया गया।
- पैदल चलने वालों और विक्रेताओं के बीच झूठा द्वंद्व: विक्रेता संघों का कहना है कि पैदल चलने वालों की अधिकांश मौतें सड़क पार करते समय होती हैं, न कि फुटपाथ पर विक्रेताओं के कारण। वे चौड़े फुटपाथों की मांग करते हैं जहां पैदल चलने वाले और विक्रेता दोनों रह सकें।
नागरिक समाज का दृष्टिकोण
दूसरी ओर, 'आई चेंज इंदिरानगर' की स्नेहा नंदीहाल ने फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के अभियान का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "इंदिरानगर में हमने एक आईटी कंपनी के कर्मचारी को साइड हसल के रूप में छोटी दुकान चलाते पाया। स्थानीय राजनेता फुटपाथ की जगह को अपनी संपत्ति की तरह किराए पर देते हैं। यह धारणा कि सभी सड़क विक्रेता गरीब हैं, गलत है और इसका दुरुपयोग हो रहा है।" उन्होंने कहा कि नागरिक निकायों को हॉकिंग जोन बनाने चाहिए।
आगे की राह
छह सड़क विक्रेता संघों ने मिलकर 'स्ट्रीट वेंडर्स जॉइंट एक्शन कमेटी' बनाई है और 8 जुलाई 2024 को बेंगलुरु में हड़ताल का आह्वान किया है। उनकी मांगों में बेदखली अभियान को तुरंत रोकना, बेदखल विक्रेताओं को उन्हीं स्थानों पर वापस बसाने की अनुमति देना, जब्त सामान वापस करना और 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का पूर्ण कार्यान्वयन शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सुरक्षित फुटपाथ अभियान क्या है?
यह बेंगलुरु में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया जा रहा अभियान है, जिसमें सड़क विक्रेताओं को भी हटाया जा रहा है।
सड़क विक्रेता क्या आरोप लगा रहे हैं?
विक्रेताओं का कहना है कि बिना नोटिस दिए बेदखली की जा रही है और 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का उल्लंघन हो रहा है।
प्रशासन का क्या तर्क है?
प्रशासन का कहना है कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं और विक्रेताओं को आंतरिक सड़कों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
विक्रेता कब हड़ताल पर जाएंगे?
सड़क विक्रेता संघों ने 8 जुलाई 2024 को बेंगलुरु में हड़ताल का आह्वान किया है।