मुख्य तथ्य
मणिपुर सरकार ने संकेत दिया है कि वह आरामबाई टेंगोल के सदस्यों के प्रति नरम रुख अपना सकती है, जबकि पुलिस स्टेशनों से हथियार लूटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य के गृह मंत्री गोविंदस कोन्थौजम ने मंगलवार (23 जून 2026) को इम्फाल में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।
विवरण
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार आरामबाई टेंगोल के सदस्यों को गिरफ्तार करने से बचने की कोशिश कर रही है, जो फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले जातीय संघर्ष में सबसे आगे था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध हथियारों को बरामद करने और मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने के अभियान में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
2023 में राज्य के शस्त्रागारों और पुलिस स्टेशनों से 5,600 से अधिक हथियार (जिनमें INSAS और AK-47 राइफलें शामिल हैं) और 500,000 राउंड गोला-बारूद लूट लिए गए थे। इन लूटपाट के लिए आरामबाई टेंगोल (जिसका अर्थ है 'डार्ट चलाने वाला घुड़सवार') सहित कई समूहों पर आरोप लगे हैं।
कोन्थौजम ने कहा, "पुलिस महानिदेशक के साथ इस समूह से जुड़े चल रहे अभियानों पर चर्चा हुई है। हमने उन व्यक्तियों और सशस्त्र समूहों से अपील की है जिनके पास अभी भी ऐसे हथियार हैं, कि वे स्वेच्छा से उन्हें सौंप दें ताकि आगे की गिरफ्तारी और प्रवर्तन कार्रवाई से बचा जा सके।"
प्रभाव और प्रतिक्रिया
गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि मणिपुर में स्थायी शांति के लिए निःशस्त्रीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लूटे गए हथियारों को बरामद करना और राज्य भर में लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करना प्राथमिक उद्देश्य है। मणिपुर में तीन प्रमुख समुदाय - मैतेई, नागा और कुकी-ज़ो - निवास करते हैं। तीन साल पहले जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से राज्य वस्तुतः इन समुदायों के बीच विभाजित हो गया है।
कोन्थौजम ने इम्फाल घाटी के लोगों से उन गतिविधियों से बचने की अपील की जो अशांति भड़का सकती हैं। यह अपील महिलाओं द्वारा तीन आरामबाई टेंगोल सदस्यों की रिहाई की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों के बाद आई है, जिन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 19-20 जून की रात गिरफ्तार किया था।
महिला नागरिक समाज संगठन मीरा पैबी की सदस्यों ने दावा किया कि आरामबाई टेंगोल के सदस्यों ने उस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान आत्मरक्षा के उपाय किए जब सरकार नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ थी। सोमवार (22 जून 2026) को महिला कार्यकर्ताओं के एक समूह ने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को ज्ञापन सौंपकर गिरफ्तार सदस्यों की "तत्काल और बिना शर्त रिहाई" की मांग की।
कार्यकर्ताओं में से एक थोकचोम चंद्रसखी देवी ने कहा, "आरामबाई टेंगोल एक सशस्त्र समूह नहीं है, बल्कि मैतेई समुदाय की पहचान को संरक्षित और संरक्षित करने के लिए गठित एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है।"
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- मणिपुर सरकार आरामबाई टेंगोल के सदस्यों के प्रति नरम रुख अपना सकती है, लेकिन हथियार बरामदगी जारी रहेगी।
- 2023 में 5,600 से अधिक हथियार लूटे गए, जिनमें से कई अभी भी बरामद नहीं हुए हैं।
- NIA ने तीन आरामबाई टेंगोल सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
- राज्य में शांति बहाली के लिए निःशस्त्रीकरण को आवश्यक बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरामबाई टेंगोल क्या है?
आरामबाई टेंगोल एक मणिपुरी संगठन है जो मैतेई समुदाय की पहचान के संरक्षण के लिए काम करता है। इसे कुछ लोग सशस्त्र समूह मानते हैं, जबकि समर्थक इसे सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन बताते हैं।
मणिपुर में कितने हथियार लूटे गए?
2023 में मणिपुर के शस्त्रागारों और पुलिस स्टेशनों से 5,600 से अधिक हथियार और 500,000 गोलियां लूटी गईं।
गृह मंत्री ने आरामबाई टेंगोल के बारे में क्या कहा?
गृह मंत्री गोविंदस कोन्थौजम ने कहा कि सरकार आरामबाई टेंगोल के सदस्यों को गिरफ्तार करने से बचना चाहती है, लेकिन हथियार बरामदगी अभियान जारी रहेगा।
महिला कार्यकर्ताओं ने क्या मांग की?
महिला कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर NIA द्वारा गिरफ्तार तीन आरामबाई टेंगोल सदस्यों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की।