मुख्य तथ्य
तमिलनाडु ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा कावेरी बेसिन में जल संसाधन परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए जारी नए दिशानिर्देशों पर कड़ी आपत्ति जताई है। राज्य के जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने विधानसभा में कहा कि केंद्र ने दिसंबर में 'एकतरफा' रूप से ये दिशानिर्देश बनाए।
विवरण
तमिलनाडु का तर्क है कि कावेरी बेसिन एक कमी वाला बेसिन है, जैसा कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के अंतिम फैसले और फरवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट किया गया है। ऐसे में, किसी भी उद्देश्य या आकार की परियोजनाओं को मंजूरी देना अनुचित है। एक जल विशेषज्ञ ने सवाल उठाया कि जब बेसिन में पानी की कमी है, तो नई परियोजनाओं का सवाल ही कहां पैदा होता है।
एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र को अपनी आपत्तियां बताईं, लेकिन केंद्र ने दिशानिर्देशों का बचाव किया।
दिशानिर्देशों में चिंताजनक प्रावधान
दिशानिर्देशों में एक प्रावधान है कि यदि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) छह महीने के भीतर अपनी राय नहीं देता है या बिना राय के प्रस्ताव वापस कर देता है, तो CWC का रुख मान लिया जाएगा। हालांकि, CWMA और CWC के बीच मतभेद की स्थिति में CWMA का रुख मान्य होगा। तमिलनाडु को आशंका है कि यह प्रावधान उसके हितों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रक्रिया
दिशानिर्देशों के अनुसार, मध्यम और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं, बहुउद्देशीय परियोजनाओं, पेयजल और औद्योगिक उपयोग परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट CWC को प्रस्तुत करनी होगी। CWC अंतर-राज्यीय मुद्दों सहित विभिन्न पहलुओं से रिपोर्ट की जांच करेगा और फिर CWMA को टिप्पणियों के लिए भेजेगा।
प्रभाव
ये दिशानिर्देश कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु पेयजल-सह-संतुलन जलाशय परियोजना के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, जो पहले से विवादित है। तमिलनाडु का मानना है कि ये दिशानिर्देश ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा दे सकते हैं जो राज्य के हितों के खिलाफ हैं।
FAQ
तमिलनाडु केंद्र के नए दिशानिर्देशों का विरोध क्यों कर रहा है?
तमिलनाडु का मानना है कि कावेरी बेसिन एक कमी वाला बेसिन है, जैसा कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, और ऐसे में नई परियोजनाओं का कोई औचित्य नहीं है।
नए दिशानिर्देशों में क्या प्रावधान है जिससे तमिलनाडु चिंतित है?
दिशानिर्देशों में प्रावधान है कि यदि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) छह महीने में अपनी राय नहीं देता है, तो केंद्रीय जल आयोग (CWC) का रुख मान लिया जाएगा, जो तमिलनाडु के हितों के खिलाफ जा सकता है।
मेकेदातु परियोजना का इस विवाद से क्या संबंध है?
कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना इसी विवाद का हिस्सा है, और तमिलनाडु का मानना है कि नए दिशानिर्देश इस परियोजना को बढ़ावा दे सकते हैं।