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Ed ने बेंगलुरु में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए 2500 करोड़ रुपये के fema उल्लंघन का पता लगाया

प्रमुख तथ्य प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु में पांच कंपनियों के परिसरों पर छापेमारी कर क्रिप्टोकरेंसी आधारित सीमा पार धन हस्तांतरण में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) उल्लंघन का…

प्रमुख तथ्य

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु में पांच कंपनियों के परिसरों पर छापेमारी कर क्रिप्टोकरेंसी आधारित सीमा पार धन हस्तांतरण में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) उल्लंघन का पता लगाया है। ये छापेमारी 17 जून को FEMA की धारा 37 के तहत की गई।

विस्तार से जानकारी

ED के अनुसार, जांच एक शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी जिसमें बेंगलुरु स्थित संस्थाओं द्वारा वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) का उपयोग करके बड़े पैमाने पर FEMA उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चला है कि कई फर्में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अधिकार प्राप्त किए बिना क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान कर रही थीं।

ED ने कहा कि ये संस्थाएं 'ऑन-रैंप' और 'ऑफ-रैंप' सेवाएं प्रदान करती थीं, जिससे उपयोगकर्ता पारंपरिक मुद्राओं को क्रिप्टो एसेट्स में बदल सकते थे और इसके विपरीत। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ग्राहकों ने कंपनी के खातों में पैसा जमा किया, जिसका उपयोग स्टेबलकॉइन खरीदने के लिए किया गया। इसके बाद डिजिटल एसेट्स को क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से बेचा गया और प्राप्तियों को प्राप्तकर्ताओं को हस्तांतरित किया गया।

प्रभाव और आगे की कार्रवाई

ED ने कहा कि जांच के तहत किसी भी संस्था को RBI द्वारा सीमा पार रेमिटेंस के लिए अधिकृत नहीं किया गया था। वे उद्देश्य कोड और विदेशी आप्रवासन रेमिटेंस प्रमाणपत्र (FIRCs) जैसी नियामक आवश्यकताओं का पालन नहीं कर रही थीं। ED ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ फर्मों ने आधिकारिक रेमिटेंस चैनलों को दरकिनार करने के लिए विदेश में संबंधित संस्थाओं के माध्यम से काम किया।

Mokshagna Technologies के मामले में, ED ने पाया कि अमेरिका में ग्राहकों से एकत्रित धन को क्रिप्टो एसेट्स में बदलकर भारतीय क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया गया। फिर प्राप्तियों को भारत में लाभार्थियों को वितरित किया गया। ED ने आरोप लगाया कि यह ऑपरेशन अमेरिका में रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा भारत में परिवार के सदस्यों के सहयोग से नियंत्रित किया जा रहा था।

ED ने यह भी आरोप लगाया कि Transak ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स का उपयोग करके परिचालन लाभ को अमेरिका स्थित एक संबंधित संस्था को हस्तांतरित किया, जबकि Carret ने क्रिप्टो ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान की और विदेशी रेमिटेंस एप्लिकेशन के साथ ओवर-द-काउंटर लेन-देन किए।

छापेमारी में टैक्स हेवन में शेल कंपनियों और अनधिकृत धन हस्तांतरण के लिए विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का पता चला। ED ने कहा कि लगभग 6 करोड़ रुपये वाले बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है और आगे की जांच जारी है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • ED ने बेंगलुरु की पांच कंपनियों पर छापेमारी की, जिनमें Transak, Carretx, Mokshagna, Buyhatke और Abhibha शामिल हैं।
  • ये कंपनियां बिना RBI की अनुमति के क्रिप्टोकरेंसी के जरिए सीमा पार धन हस्तांतरण कर रही थीं।
  • कुल 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है और 6 करोड़ रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ED ने किन कंपनियों पर छापेमारी की?

ED ने Transak Technology India Pvt. Ltd., Carretx Technologies Pvt. Ltd., Mokshagna Technologies Pvt. Ltd., Buyhatke Internet Pvt. Ltd., और Abhibha Technologies Pvt. Ltd. पर छापेमारी की।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कितने रुपये का लेन-देन हुआ?

ED के अनुसार, इन कंपनियों ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए 2500 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लेन-देन किया।

क्या इन कंपनियों के पास RBI की अनुमति थी?

नहीं, ED के अनुसार इनमें से किसी भी कंपनी के पास सीमा पार रेमिटेंस के लिए RBI की अनुमति नहीं थी।

ED ने कितने रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए?

ED ने लगभग 6 करोड़ रुपये के बैंक खातों को फ्रीज किया है।

स्रोत: www.thehindu.com

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