मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व मंत्री एच. सी. महादेवप्पा ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपने 40 वर्षों से अधिक के राजनीतिक करियर में कभी मंत्री पद या विभाग की मांग नहीं की। वह मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के शपथ ग्रहण के बाद गठित मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए थे। मैसूरु में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान का फैसला अंतिम है और वह इसे स्वीकार करते हैं।
विस्तार से
मंत्री पद से बाहर रखे जाने पर प्रतिक्रिया
महादेवप्पा ने कहा, "हाईकमान ने अपनी गणना के आधार पर कुछ फैसले लिए हैं। हाईकमान जो भी फैसला लेता है, वह अंतिम होता है।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी मंत्री पद या विभाग नहीं मांगा और दिल्ली जाकर पद के लिए पैरवी करने की संभावना से भी इनकार किया।
भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया
पूर्व मंत्री ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को दी गई भ्रष्टाचार की शिकायत को "निराधार" बताते हुए सख्ती से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह संविधान और लोकतंत्र के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए संगठनों के साथ काम करते रहेंगे।
यतींद्र सिद्धारमैया के मंत्री बनने पर रुख
जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी ने यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्री बनाने के लिए उन्हें हटाया है, तो महादेवप्पा ने कहा कि वह यतींद्र और अपने बेटे सुनील बोस में कोई अंतर नहीं देखते। उन्होंने कहा, "मैं चाहूंगा कि यतींद्र और सुनील दोनों उन्हीं वंचित वर्गों के लिए काम करें, जिनके लिए मैं और सिद्धारमैया काम कर रहे थे।"
प्रभाव और विश्लेषण
महादेवप्पा का यह बयान कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी समीकरणों को उजागर करता है। सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले महादेवप्पा को मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया, जबकि सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र को शामिल किया गया। यह कदम पार्टी के भीतर वंशवाद और वफादारी के सवाल उठाता है। हालांकि, महादेवप्पा ने इसे स्वीकार करते हुए पार्टी अनुशासन का पालन किया है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- महादेवप्पा मैसूरु जिले के टी. नरसीपुरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और सिद्धारमैया सरकार में मंत्री थे।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मंत्री पद के लिए कोई लॉबिंग नहीं करेंगे।
- वह भविष्य में संविधान और लोकतंत्र के प्रति जागरूकता अभियानों में सक्रिय रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या एच. सी. महादेवप्पा ने कभी मंत्री पद मांगा था?
नहीं, उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने 40 साल के राजनीतिक करियर में कभी मंत्री पद या विभाग नहीं मांगा।
महादेवप्पा को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने पर उनकी प्रतिक्रिया क्या थी?
उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान ने अपनी गणना के आधार पर फैसला लिया है और वह इसे अंतिम मानते हैं।
क्या महादेवप्पा ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कुछ कहा?
हां, उन्होंने राज्यपाल को दी गई भ्रष्टाचार की शिकायत को निराधार बताया और खारिज किया।
क्या महादेवप्पा यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्री बनाए जाने से सहमत हैं?
उन्होंने कहा कि वह यतींद्र और अपने बेटे सुनील बोस में कोई अंतर नहीं देखते और चाहते हैं कि दोनों वंचित वर्गों के लिए काम करें।