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Bidadi Township Project: विरोध सिर्फ राजनीतिक, शिवकुमार को सीएम बनते देख बेचैन हैं विपक्षी नेता – मगडी विधायक

परियोजना का विरोध राजनीतिक, शिवकुमार को सीएम बनते देख बेचैन हैं विपक्षी नेता बेंगलुरु: मगडी विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने आरोप लगाया है कि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के नेता बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट का विरोध…

परियोजना का विरोध राजनीतिक, शिवकुमार को सीएम बनते देख बेचैन हैं विपक्षी नेता

बेंगलुरु: मगडी विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने आरोप लगाया है कि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के नेता बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट का विरोध सिर्फ राजनीतिक कारणों से कर रहे हैं, क्योंकि वे डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनते देख बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। बुधवार (17 जून) को बिदादी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह विरोध पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।

क्या है बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट?

बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट एक बड़ी आवासीय और व्यावसायिक विकास परियोजना है, जिसे 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुरू किया था। बाद में इसे 'रेड जोन' घोषित कर दिया गया, जिससे भूमि रूपांतरण और विकास कार्य ठप हो गए। हाल ही में कांग्रेस सरकार ने किसानों की मांगों के बाद इस परियोजना को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है।

विधायक बालकृष्ण का आरोप

बालकृष्ण ने कहा, “भाजपा और जद(एस) के नेता बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट का विरोध पूरी तरह से राजनीतिक कारणों से कर रहे हैं, क्योंकि वे डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनते देख बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सिद्धरमैया मुख्यमंत्री थे और भूमि अधिग्रहण चल रहा था, तब किसान विरोध कर रहे थे, लेकिन तब एच.डी. कुमारस्वामी और आर. अशोक क्यों सामने नहीं आए? उन्होंने आरोप लगाया कि वोक्कालिगा समुदाय के नेता शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनते देख बेचैन हैं।

कांग्रेस के भीतर एकता पर जोर

बालकृष्ण ने कहा कि विपक्षी नेताओं को उम्मीद थी कि कांग्रेस आंतरिक कलह में बंट जाएगी। उनका मानना था कि सिद्धरमैया कभी सत्ता नहीं छोड़ेंगे और शिवकुमार कभी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन सिद्धरमैया ने सत्ता हस्तांतरित कर दी, जिसे वे पचा नहीं पा रहे।

परियोजना का इतिहास और किसानों की मांग

बालकृष्ण ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना शिवकुमार ने नहीं, बल्कि कुमारस्वामी ने 2006 में शुरू की थी। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद किसानों ने याचिकाएं दायर कर या तो रेड जोन वर्गीकरण हटाने या मुआवजे की मांग की। इन्हीं मांगों के जवाब में परियोजना को पुनर्जीवित किया गया।

जमीन की वास्तविक स्थिति

विधायक ने दावा किया कि बिदादी की अधिकांश जमीन अब कृषि योग्य नहीं रही और रियल एस्टेट लेआउट में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने कहा, “अगर कुमारस्वामी ने इसे रेड जोन घोषित नहीं किया होता, तो यह सब रियल एस्टेट माफिया के हाथों में चला गया होता। रेड जोन वर्गीकरण के कारण भूमि रूपांतरण संभव नहीं हो पाया और ये क्षेत्र कृषि भूमि के रूप में बने रहे।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया और विवाद

इससे पहले, स्थानीय किसानों ने बालकृष्ण के इस तरह के बयानों को चुनौती दी थी और उन्हें अपने गांवों में बहस के लिए आमंत्रित किया था। फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में गर्मागर्मी बनी हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट क्या है?

यह एक आवासीय और व्यावसायिक विकास परियोजना है जिसे 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुरू किया था। बाद में इसे रेड जोन घोषित कर दिया गया, जिससे भूमि रूपांतरण रुक गया।

विपक्ष इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहा है?

मगडी विधायक के अनुसार, BJP और JD(S) नेता डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनते देख बेचैन हैं और राजनीतिक कारणों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

किसानों की क्या मांग है?

किसान या तो रेड जोन वर्गीकरण हटाने या मुआवजे की मांग कर रहे हैं। सरकार ने इन्हीं मांगों के जवाब में परियोजना को पुनर्जीवित किया है।

क्या बिदादी की जमीन अब भी कृषि योग्य है?

विधायक का दावा है कि अधिकांश जमीन अब कृषि योग्य नहीं रही और रियल एस्टेट में तब्दील हो चुकी है। रेड जोन वर्गीकरण के कारण ही यह जमीन रियल एस्टेट माफिया के हाथों में जाने से बची है।

Source: www.thehindu.com

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