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कलकत्ता हाईकोर्ट ने रितबरता बनर्जी को विपक्ष के नेता नियुक्त किए जाने पर उठाए सवाल, आदेश सुरक्षित

मुख्य तथ्य कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक सोभंदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र नाथ बोस के 3…

मुख्य तथ्य

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक सोभंदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र नाथ बोस के 3 जून के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने TMC से निष्कासित विधायक रितबरता बनर्जी को विपक्ष का नेता (LoP) मान्यता दी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

1 जून 2026 को रितबरता बनर्जी और संदीपन साहा को TMC से निष्कासित कर दिया गया था। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस दावे के बाद हुई कि इन दोनों विधायकों की शिकायत पर CID ने कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच शुरू की थी। दोनों विधायकों ने आरोप लगाया था कि 19 मई के एक प्रस्ताव पर कई TMC विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे, जिसमें चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित किया गया था। स्पीकर ने इस मामले में पुलिस जांच के आदेश दिए थे। अभिषेक बनर्जी, जिन्होंने यह प्रस्ताव स्पीकर को भेजा था, पुलिस के लिए मुख्य संदिग्ध माने जाते हैं।

अदालत में बहस

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने बार-बार स्पीकर के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने TMC से निष्कासित सदस्य को विपक्ष का नेता मान्यता दी, जबकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए अनुशंसित किया था। स्पीकर की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने पक्ष रखा, जबकि चट्टोपाध्याय की ओर से TMC लोकसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने बहस की।

अदालत ने पूछा कि क्या हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप स्पीकर के लिए TMC के प्रस्ताव को नजरअंदाज करने और बनर्जी को LoP मान्यता देने के लिए पर्याप्त है, जबकि जालसाजी अभी अदालत में साबित नहीं हुई है। अदालत ने भट्टाचार्य के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि रितबरता बनर्जी का निष्कासन TMC का आंतरिक मामला है और इसलिए विधानसभा के लिए अप्रासंगिक है।

कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि एक स्पीकर पार्टी की अनदेखी करके LoP का चयन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, "विधायक एक राजनीतिक दल का हिस्सा होते हैं। स्पीकर पार्टी के फैसले को कैसे नजरअंदाज कर सकता है?"

भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि 3 जून को 58 विद्रोही विधायकों में से 56 ने रितबरता बनर्जी को LoP चुनने का फैसला किया। हालांकि, अदालत ने बार-बार पूछा कि स्पीकर ने TMC के 19 मई के पत्र को क्यों नजरअंदाज किया, जिसमें कहा गया था कि 78 विधायकों ने चट्टोपाध्याय को LoP चुना।

अदालत का सवाल

अपना आदेश सुरक्षित रखने से पहले, अदालत ने यह भी पूछा कि क्या स्पीकर को अपना फैसला सुनाने से पहले TMC को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए था।

FAQ

कलकत्ता हाईकोर्ट ने रितबरता बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाए जाने पर क्या सवाल उठाए?

अदालत ने पूछा कि क्या हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप स्पीकर के लिए पार्टी के प्रस्ताव को नजरअंदाज करने के लिए पर्याप्त है, और क्या स्पीकर को निर्णय से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए था।

रितबरता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस से कब निष्कासित किया गया?

रितबरता बनर्जी और संदीपन साहा को 1 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था।

सोभंदेब चट्टोपाध्याय ने क्या याचिका दायर की है?

तृणमूल कांग्रेस विधायक सोभंदेब चट्टोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के 3 जून के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिसमें निष्कासित विधायक रितबरता बनर्जी को विपक्ष का नेता माना गया।

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