प्रमुख तथ्य
राज्यसभा सभापति ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ छह भाजपा सांसदों द्वारा दिए गए विशेषाधिकार उल्लंघन प्रस्ताव को विशेषाधिकार समिति को भेज दिया है। यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर है।
विवरण
भाजपा सांसदों बृज लाल, मिथिलेश कुमार, सुमित्रा बाल्मीक, शिवेश कुमार, सिकंदर कुमार और नगेंद्र राय ने यह प्रस्ताव राज्यसभा नियम 188 के तहत दिया। उनका आरोप है कि खड़गे ने अप्रैल में प्रधानमंत्री को 'आतंकवादी' कहा, जिससे संसद की गरिमा कम हुई।
खड़गे ने स्पष्ट किया, 'मैंने कहा कि कर आतंकवाद हो रहा है, ED, आयकर विभाग और CBI छापे मार रहे हैं... यह आतंकवाद PM द्वारा सुविधाजनक बनाया जा रहा है। मैंने उन्हें आतंकवादी नहीं कहा।'
समिति को संदर्भ
राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना के अनुसार, सभापति ने 16 जून 2026 को इस मामले को नियम 203 के तहत विशेषाधिकार समिति को भेजा। समिति के अध्यक्ष उपसभापति हरिवंश हैं, जबकि सदस्यों में सुधांशु त्रिवेदी, दीपक प्रकाश, सुमेर सिंह सोलंकी, सुरेंद्र सिंह नागर, मनन कुमार मिश्रा (सभी भाजपा) और निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा शामिल हैं।
प्रभाव और आगे की प्रक्रिया
यह मामला संसदीय विशेषाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को उजागर करता है। समिति जांच कर रिपोर्ट सदन को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
- यह मामला संसदीय प्रक्रिया और सदस्यों के आचरण से जुड़ा है।
- खड़गे ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि वह सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे।
- समिति की रिपोर्ट के बाद ही आगे का फैसला होगा।
FAQ
खड़गे पर क्या आरोप है?
उन पर प्रधानमंत्री मोदी को 'आतंकवादी' कहने का आरोप है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने 'कर आतंकवाद' की बात कही थी।
प्रस्ताव किस नियम के तहत दिया गया?
यह राज्यसभा के नियम 188 के तहत दिया गया है।
समिति के अध्यक्ष कौन हैं?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश समिति के अध्यक्ष हैं।