मंत्री का बयान: लापरवाही से इनकार
कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने मैसूर स्थित श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च में 11 मरीजों की मौत पर चिंता जताई, लेकिन स्पष्ट किया कि इसमें कोई लापरवाही नहीं है। बुधवार (17 जून) को अस्पताल का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मौतों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसकी जांच एक स्वतंत्र कार्डियोलॉजिस्ट टीम करेगी।
मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कम
मंत्री ने बताया कि जयदेव अस्पताल के बेंगलुरु, मैसूर और कलबुर्गी यूनिटों में मृत्यु दर 4 से 6% के बीच है, जो राष्ट्रीय औसत 9 से 11% से काफी कम है। उन्होंने कहा, "जयदेव एक तृतीयक देखभाल अस्पताल है और मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से नीचे है।"
गंभीर मरीजों की मौत
मंत्री ने कहा कि जो मरीज मरे हैं, वे अलग-अलग दिनों में भर्ती हुए थे और गंभीर स्थिति में थे। प्राथमिक तौर पर मौतों का कोई अस्वाभाविक कारण नहीं दिखता। उन्होंने समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कार्डियक इवेंट के बाद 'गोल्डन ऑवर' में अस्पताल लाए गए मरीजों के बचने की संभावना अधिक होती है।
सरकार की योजनाएं
मंत्री ने बताया कि सरकार तीनों जयदेव यूनिटों के लिए अतिरिक्त डॉक्टरों की भर्ती कर रही है, जो अगले दो महीनों में पूरी हो जाएगी। साथ ही, मैसूर और कलबुर्गी यूनिटों के प्रशासन को विकेंद्रीकृत करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार नियुक्तियों और निर्णयों में अधिक स्वायत्तता प्राप्त कर सकें।
जनता में विश्वास बनाए रखने की अपील
मंत्री ने चिंता जताई कि ऐसी खबरों से जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ेगी। उन्होंने कहा, "अगर लोग जयदेव जैसी संस्थाओं पर विश्वास खो देंगे, तो इसका फायदा केवल निजी अस्पतालों को होगा। गरीब मरीज इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकते।"
अस्पताल का दौरा
मंत्री के साथ विधायक के. हरीश गौड़ा, संस्थान के निदेशक बी. दिनेश और चिकित्सा अधीक्षक के.एस. सदानंद भी मौजूद थे। उन्होंने अस्पताल का दौरा किया, मरीजों और उनके परिचरों से बातचीत की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जयदेव अस्पताल में 11 मौतों का कारण क्या है?
मंत्री शरण प्रकाश पाटिल के अनुसार, मरीज गंभीर स्थिति में भर्ती थे और प्राथमिक तौर पर कोई अस्वाभाविक कारण नहीं पाया गया है। रिपोर्ट की जांच एक स्वतंत्र कार्डियोलॉजिस्ट टीम करेगी।
जयदेव अस्पताल की मृत्यु दर कितनी है?
जयदेव अस्पताल के बेंगलुरु, मैसूर और कलबुर्गी यूनिटों में मृत्यु दर 4 से 6% के बीच है, जो राष्ट्रीय औसत 9-11% से काफी कम है।
क्या सरकार ने कोई कदम उठाया है?
सरकार तीनों यूनिटों के लिए अतिरिक्त डॉक्टरों की भर्ती कर रही है, जो दो महीने में पूरी होगी। साथ ही, मैसूर और कलबुर्गी यूनिटों को अधिक स्वायत्तता देने पर विचार किया जा रहा है।
स्रोत: www.thehindu.com