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बेंगलुरु विकास पोर्टफोलियो को लेकर कर्नाटक कैबिनेट में खींचतान

बेंगलुरु विकास पोर्टफोलियो को लेकर कर्नाटक कैबिनेट में खींचतान कर्नाटक में नई कैबिनेट के गठन के बाद बेंगलुरु विकास मंत्री पद को लेकर सियासी खींचतान जारी है। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार, वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी और कृष्णा…

बेंगलुरु विकास पोर्टफोलियो को लेकर कर्नाटक कैबिनेट में खींचतान

कर्नाटक में नई कैबिनेट के गठन के बाद बेंगलुरु विकास मंत्री पद को लेकर सियासी खींचतान जारी है। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार, वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी और कृष्णा बायरे गौड़ा के बीच इस पोर्टफोलियो को लेकर मतभेद सामने आए हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बीडीए और बीएमआरडीए को अपने पास रखते हुए बाकी जिम्मेदारियां बायरे गौड़ा को सौंपी हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।

पोर्टफोलियो विवाद की मुख्य बातें

  • शिवकुमार: वे इस पोर्टफोलियो को अपने पास रखना चाहते थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने इसे बायरे गौड़ा को देने का फैसला किया।
  • रामलिंगा रेड्डी: उन्होंने शुरू में इस पोर्टफोलियो की मांग की, लेकिन बाद में जल संसाधन मंत्रालय स्वीकार कर लिया।
  • कृष्णा बायरे गौड़ा: उन्होंने बीडीए और बीएमआरडीए के बिना पदभार नहीं लेने की जिद की, लेकिन 16 जून को बिना इनके पदभार ग्रहण किया।

बेंगलुरु विकास पोर्टफोलियो का इतिहास

बेंगलुरु विकास मंत्री पद की शुरुआत 1990 के दशक में आईटी बूम के बाद हुई थी, जब अनंत नाग और वी. सोमन्ना जैसे नेताओं ने इस पद को संभाला। हालांकि, एस.एम. कृष्णा के कार्यकाल में यह पद समाप्त कर दिया गया था। 2015 में के.जे. जॉर्ज को बेंगलुरु विकास मंत्री बनाकर इसे पुनर्जीवित किया गया। 2019-2021 के दौरान बी.एस. येदियुरप्पा के शासन में यह पद नहीं था, लेकिन बसवराज बोम्मई (2021-23) के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने खुद इसकी जिम्मेदारी संभाली।

विभाजन का प्रभाव

बीडीए और बीएमआरडीए को मुख्यमंत्री के पास रखने से बेंगलुरु विकास मंत्री की शक्तियां सीमित हो गई हैं। बेंगलुरु दक्षिण के भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे 'शासन पक्षाघात' बताते हुए पूर्ण अधिकार वाले मंत्री की मांग की है। ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) अधिनियम, 2024 के तहत मुख्यमंत्री अध्यक्ष और बेंगलुरु विकास मंत्री सह-अध्यक्ष हैं, लेकिन बीडीए और बीएमआरडीए के मुख्यमंत्री के पास रहने से जीबीए के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

  • बेंगलुरु विकास मंत्री के पास अब ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण, पांच शहर निगम, बीडब्ल्यूएसएसबी और बीएमआरसीएल की जिम्मेदारी है।
  • बीडीए और बीएमआरडीए मुख्यमंत्री के अधीन हैं, जिससे शहर के विकास में समन्वय की कमी हो सकती है।
  • यह पहली बार है जब बेंगलुरु विकास मंत्री को कानूनी मान्यता मिली है, लेकिन शक्तियों का विभाजन विवादास्पद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु विकास मंत्री पोर्टफोलियो विवाद क्या है?

कर्नाटक कैबिनेट में बेंगलुरु विकास मंत्री पद को लेकर शिवकुमार, रामलिंगा रेड्डी और कृष्णा बायरे गौड़ा के बीच खींचतान है। मुख्यमंत्री ने BDA और BMRDA अपने पास रख लिए हैं, जिससे पोर्टफोलियो का विभाजन हुआ है।

बेंगलुरु विकास मंत्री के पास क्या जिम्मेदारियां हैं?

बेंगलुरु विकास मंत्री के पास ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण, पांच शहर निगम, BWSSB और BMRCL की जिम्मेदारी है, जबकि BDA और BMRDA मुख्यमंत्री के पास हैं।

ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) क्या है?

GBA एक नई संस्था है जो बेंगलुरु की विभिन्न विकास एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए बनाई गई है। इसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री और सह-अध्यक्ष बेंगलुरु विकास मंत्री होता है।

बेंगलुरु विकास मंत्री पद की शुरुआत कब हुई?

बेंगलुरु विकास मंत्री पद की शुरुआत 1990 के दशक में आईटी बूम के बाद हुई थी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। 2015 में के.जे. जॉर्ज के साथ इसे पुनर्जीवित किया गया।

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