परिचय
बेंगलुरु स्थित कलाकार मोहम्मद साजिद की चित्रण श्रृंखला 'फोक्स ऑफ केरल' के दूसरे संस्करण को प्रतिष्ठित AOI वर्ल्ड इलस्ट्रेशन अवार्ड 2026 के लिए चुना गया है। यह श्रृंखला केरल के उन लोगों को समर्पित है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है — फूल विक्रेता, मछली विक्रेता, सुरक्षा गार्ड, सड़क सफाई कर्मचारी और अन्य। साजिद इन पात्रों को नाम, पहचान और कहानियाँ देते हैं, उन्हें पृष्ठभूमि में फीका नहीं पड़ने देते।
प्रमुख तथ्य
- श्रृंखला का दूसरा संस्करण AOI वर्ल्ड इलस्ट्रेशन अवार्ड 2026 के लिए नामांकित है।
- इसमें आठ चित्र शामिल हैं: चाय बनाने वाला, सुरक्षा गार्ड, दर्जी, सड़क सफाई कर्मचारी, मछली विक्रेता, नारियल फाइबर कर्मचारी, डाकिया और फूल विक्रेता।
- पहला संस्करण 2018 में 13 चित्रों के साथ बनाया गया था, जो भारतीय लोक सौंदर्यशास्त्र पर आधारित था।
विस्तार से जानकारी
प्रेरणा और पृष्ठभूमि
साजिद, जो मूल रूप से कोझिकोड के पेराम्ब्रा से हैं, ने 2015 में डिज़ाइन और एप्लाइड आर्ट्स में स्नातक करने के बाद बेंगलुरु में काम करना शुरू किया। शहरी जीवन की तेज़ रफ़्तार और घर की याद ने उन्हें अपने समुदाय पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। वे कहते हैं, "मुझे लगा कि बेंगलुरु में लोग मुस्कुराने में हिचकिचाते हैं। जब वे मुस्कुराते भी थे, तो वह अलग लगता था। मैं एक ऐसे समुदाय में बड़ा हुआ हूँ जहाँ हम अपने पड़ोसियों के बारे में सब कुछ जानते थे।"
पहले और दूसरे संस्करण में अंतर
पहले संस्करण में त्वचा के रंग के लिए नीले रंग का उपयोग किया गया था और चित्रों में बहुत कम संदर्भ दिए गए थे। दूसरे संस्करण में, साजिद ने अधिक यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने विषयों को उनसे जुड़ी वस्तुओं और शब्दों से घेरा है, और चित्र पूरा होने के बाद उन्हें नाम और पृष्ठभूमि दी है। रंग पैलेट और कंट्रास्ट भी बदल गया है। यह श्रृंखला पॉप आर्ट से प्रेरित अधिकतमवादी शैली में बनाई गई है, जिसमें टाइपोग्राफी, ग्रिडलाइन और डिज़ाइन चिह्न शामिल हैं।
AI को चुनौती
साजिद ने चित्रों में जानबूझकर रेखाएँ और बिंदु जोड़े हैं ताकि AI उनकी शैली की नकल न कर सके। वे कहते हैं, "AI का उपयोग करके हमारी शैली में कला बनाना मेरे लिए अस्वीकार्य है। कुछ लोग इन निशानों को खुरदरा काम समझ सकते हैं, लेकिन ये मेरे डिज़ाइन छात्र होने के प्रशिक्षण की ओर भी संकेत करते हैं।"
केरल का रंग
साजिद के काम में जीवंतता केरल की संस्कृति से आती है। वे कहते हैं, "केरल में बड़े होते हुए, मंदिर के त्योहार रंगों का विस्फोट होते थे। हमारी सड़कों पर लॉरियाँ, बस स्टॉप पर पोस्टर, ऑटोरिक्शा के नंबर प्लेट के बगल में चित्र — कुछ भी दबा हुआ नहीं है।" उनकी माँ ने भी उन्हें प्रभावित किया, जो धार्मिक प्रतिबंधों के बावजूद पत्रिकाओं से अभिनेताओं के चित्र बनाती थीं।
प्रभाव और महत्व
यह श्रृंखला केरल के आम लोगों को एक मंच प्रदान करती है और उनकी अनदेखी कहानियों को उजागर करती है। AOI वर्ल्ड इलस्ट्रेशन अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित मंच पर नामांकन इस कला के वैश्विक महत्व को दर्शाता है।
पाठकों के लिए सारांश
मोहम्मद साजिद की 'फोक्स ऑफ केरल' श्रृंखला केरल के रोज़मर्रा के लोगों को सम्मानित करती है। दूसरा संस्करण अधिक यथार्थवादी और विस्तृत है, जिसमें AI को चुनौती देने वाले तत्व शामिल हैं। यह श्रृंखला AOI वर्ल्ड इलस्ट्रेशन अवार्ड 2026 के लिए नामांकित है।
FAQ
फोक्स ऑफ केरल श्रृंखला क्या है?
यह मोहम्मद साजिद द्वारा बनाई गई एक चित्रण श्रृंखला है जो केरल के आम लोगों जैसे फूल विक्रेता, मछली विक्रेता, सुरक्षा गार्ड और सड़क सफाई कर्मचारियों को केंद्र में रखती है।
इस श्रृंखला को किस पुरस्कार के लिए चुना गया है?
दूसरे संस्करण को AOI वर्ल्ड इलस्ट्रेशन अवार्ड 2026 के लिए नामांकित किया गया है।
कलाकार मोहम्मद साजिद कहाँ से हैं?
वह कोझिकोड के पेराम्ब्रा से ताल्लुक रखते हैं और वर्तमान में बेंगलुरु में रहते हैं।
इस श्रृंखला में AI को चुनौती कैसे दी गई है?
साजिद ने चित्रों में रेखाएँ और बिंदु जोड़े हैं ताकि AI उनकी शैली की नकल न कर सके।
स्रोत: www.thehindu.com