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G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी और यूएई राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त नेविगेशन का आह्वान किया

मुख्य बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने मंगलवार को फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा…

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने मंगलवार को फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त नेविगेशन का आह्वान किया।

विस्तार से जानकारी

प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों पक्षों ने 'सभी क्षेत्रों में भारत-यूएई संबंधों और हमारी व्यापक सामरिक साझेदारी को और गति देने के तरीकों पर चर्चा की।' मोदी ने यूएई में चार मिलियन से अधिक भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए राष्ट्रपति बिन जायद और यूएई सरकार को धन्यवाद दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने 'पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता' पर विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, चर्चा में प्रौद्योगिकी, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा में सहयोग शामिल था। मोदी ने पश्चिम एशिया में 'संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान' के महत्व पर जोर दिया। बयान में कहा गया, 'दोनों पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से मुक्त, सुरक्षित और निर्बाध नेविगेशन, व्यापार और वाणिज्य जारी रखने का आह्वान किया।'

भारत-ब्रिटेन संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CEPA) को लागू करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। यह मुक्त व्यापार समझौता अभी ब्रिटेन की संसद द्वारा अनुसमर्थित नहीं हुआ है। मोदी ने स्टार्मर के साथ बैठक के बाद कहा कि पिछला वर्ष भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए 'उत्कृष्ट' रहा है, जिसमें व्यापार समझौते ने आर्थिक सहयोग के कई रास्ते खोले हैं। उन्होंने कहा, 'आज की बातचीत इस बात पर केंद्रित थी कि भारत-ब्रिटेन संबंधों को और गति कैसे दी जाए।' दोनों पक्षों ने नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया।

मोदी और स्टार्मर के बीच वार्ता में विज़न 2035 के सभी स्तंभों के तहत सहयोग शामिल था, जिसमें व्यापार और आर्थिक विकास, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और हरित ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, तथा शिक्षा और लोगों से लोगों के संबंध शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'नेताओं ने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के शीघ्र लागू होने की उम्मीद जताई।' मोदी ने द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल के तहत प्रगति का स्वागत किया, जिसमें हाल ही में भारत-ब्रिटेन क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी का शुभारंभ शामिल है। मोदी और स्टार्मर ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन की स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी चर्चा की।

प्रभाव और महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहाँ मुक्त नेविगेशन का आह्वान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और यूएई के बीच मजबूत साझेदारी पश्चिम एशिया में स्थिरता को बढ़ावा देती है। वहीं, भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की क्षमता रखता है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • प्रधानमंत्री मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर यूएई और ब्रिटेन के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त नेविगेशन का आह्वान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है।
  • भारत-ब्रिटेन CEPA के शीघ्र लागू होने से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी और यूएई राष्ट्रपति के बीच क्या मुद्दे उठे?

दोनों नेताओं ने ऊर्जा सहयोग, प्रौद्योगिकी, व्यापार, निवेश और रक्षा क्षेत्रों में साझेदारी पर चर्चा की। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त नेविगेशन का आह्वान किया।

पीएम मोदी और ब्रिटिश पीएम स्टार्मर के बीच क्या चर्चा हुई?

दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CEPA) के शीघ्र लागू होने, रक्षा, प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा में सहयोग पर बात की।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व क्या है?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।

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