मुख्य तथ्य
मिजोरम की एक जिला अदालत ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के दो जवानों को 2017 में हुए गैंगरेप, एसिड अटैक और हत्या के मामले में 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिल्वी ज़ोमुआनपुई राल्टे ने 12 जून 2026 को यह फैसला सुनाया, जिसे 16 जून को सार्वजनिक किया गया।
मामले का विवरण
दोषी नीलांजन दास और दिनेश कुमार को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया, जिनमें गैंगरेप, गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाने वाला बलात्कार और एसिड अटैक शामिल हैं। हालांकि, पीड़िता के शव के विघटित अवस्था में मिलने के बावजूद उन्हें हत्या (धारा 302) से बरी कर दिया गया।
घटना का क्रम
यह घटना 16 जुलाई 2017 को मामित जिले के सिलसुरी वेस्ट में भारत-बांग्लादेश सीमा पर हुई थी। पीड़िताएं गस्कटा नदी के पास केकड़े और जंगली सब्जियां इकट्ठा करने गई थीं, जहां दो अज्ञात व्यक्तियों ने उनके साथ गैंगरेप किया और एक पर एसिड से हमला कर दिया।
जांच और सबूत
पीड़िता के भाई ने 18 जुलाई 2017 को मारपारा थाने में FIR दर्ज कराई। जांच में BSF के ड्यूटी रोस्टर से दोनों दोषियों की पहचान हुई। पुलिस को शुरू में BSF अधिकारियों से सहयोग नहीं मिला, लेकिन बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप से नमूने लिए गए। 5 सितंबर 2017 को आयोजित पहचान परेड में पीड़िता ने दोनों आरोपियों की पहचान की।
सजा का विवरण
अदालत ने तीन अलग-अलग मामलों में क्रमशः 20, 12 और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही प्रत्येक अपराध के लिए 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी कहा कि दोषियों को अपील का अधिकार है।
प्रभाव और सीख
यह मामला सीमा सुरक्षा बलों में अनुशासन और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है। पीड़िता को न्याय मिला है, लेकिन एसिड अटैक से उसका जीवन स्थायी रूप से प्रभावित हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
BSF के दो जवानों को कितने साल की सजा सुनाई गई?
दोनों दोषियों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
यह घटना कब और कहां हुई थी?
यह घटना 16 जुलाई 2017 को मिजोरम के मामित जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर हुई थी।
पीड़िताओं की हालत क्या है?
एक पीड़िता की मौत हो गई थी, जबकि दूसरी बच गई लेकिन एसिड अटैक से उसका चेहरा बुरी तरह जल गया और आंशिक दृष्टि हानि हुई।
स्रोत: www.thehindu.com