केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला
केंद्र सरकार ने 100% इथेनॉल को पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में उपयोग करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले का कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ ने स्वागत किया है। संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शांताकुमार ने कहा कि यह किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है।
किसानों की दो दशक पुरानी मांग पूरी
शांताकुमार ने याद दिलाया कि 2006 में मैसूर में आयोजित दक्षिण भारतीय किसान सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें केंद्र सरकार से गन्ने से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने और इसे ईंधन के रूप में उपयोग करने की अनुमति देने का आग्रह किया गया था। उस सम्मेलन में तर्क दिया गया था कि इथेनॉल को बड़े पैमाने पर अपनाने से भारत के ईंधन आयात बिल में काफी कमी आ सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
विदेशी मुद्रा में भारी बचत
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान का हवाला देते हुए शांताकुमार ने कहा कि इथेनॉल के व्यापक उपयोग से देश को विदेशी मुद्रा में 22 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। इस नीति से गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रतिस्पर्धा से किसानों को लाभ
इस फैसले से इथेनॉल उत्पादक कारखानों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर और लाभदायक मूल्य मिल सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्र सरकार ने इथेनॉल को लेकर क्या फैसला लिया है?
केंद्र सरकार ने 100% इथेनॉल को पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में उपयोग करने की मंजूरी दे दी है।
इस फैसले से किसानों को क्या लाभ होगा?
इस फैसले से गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों को नए अवसर मिलेंगे और उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
इथेनॉल के उपयोग से देश को कितनी बचत होगी?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इथेनॉल के व्यापक उपयोग से देश को विदेशी मुद्रा में 22 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।