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Rti कार्यकर्ताओं को sc से झटका: ‘नया व्यवसाय’ बन गया है सक्रियता

प्रमुख तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब के एक तथाकथित RTI कार्यकर्ता और उसके सहयोगी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि RTI सक्रियता अब ‘नया व्यवसाय’ बन गई…

प्रमुख तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब के एक तथाकथित RTI कार्यकर्ता और उसके सहयोगी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि RTI सक्रियता अब 'नया व्यवसाय' बन गई है। यह टिप्पणी तब आई जब कोर्ट ने आरोपियों द्वारा सड़क निर्माण परियोजना में बाधा डालने के मामले की सुनवाई की।

मामले का विवरण

न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने रमेश कुमार बहल और एक अन्य व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, 'आप लोगों को काम नहीं करने देते और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकते हैं। आप कौन होते हैं सड़क निर्माण की प्रगति की निगरानी करने वाले? क्या आप कोई इंजीनियर या वरिष्ठ अधिकारी या जनता के अधिकृत प्रतिनिधि हैं? आप तथाकथित RTI कार्यकर्ता हैं।' पीठ ने आगे कहा, 'RTI सक्रियता अब एक नया व्यवसाय बन गई है।'

आरोप और बचाव

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश महाजन ने तर्क दिया कि वर्तमान FIR ठेकेदारों और अधिकारियों को बचाने के लिए दर्ज की गई है, जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि बटाला में सड़क परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 57 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिनका ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग करके दुरुपयोग किया जा रहा है।

पीठ ने इसे 'पीली पत्रकारिता' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा, 'केंद्र सरकार ने धन जारी किया है। केंद्र सरकार निर्माण का ध्यान रखेगी। आप कोई नहीं हैं।'

हाई कोर्ट का आदेश

याचिकाकर्ताओं ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 14 मई 2026 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा था, 'आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, अपीलकर्ताओं को सौंपी गई सक्रिय भूमिका और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए यह न्यायालय अपीलकर्ताओं के पक्ष में विवेक का प्रयोग करने के लिए प्रेरित नहीं है। अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।'

प्रभाव और सीख

यह मामला RTI कार्यकर्ताओं के अधिकारों और जिम्मेदारियों पर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि RTI का अधिकार सरकारी कामकाज में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। कार्यकर्ताओं को अपने अधिकारों का प्रयोग करते समय कानूनी सीमाओं का पालन करना चाहिए।

FAQ

  • सुप्रीम कोर्ट ने RTI कार्यकर्ताओं को अग्रिम जमानत क्यों नहीं दी? कोर्ट ने कहा कि वे सड़क निर्माण कार्य में बाधा डाल रहे थे और सरकारी कर्मचारियों को काम नहीं करने दे रहे थे। इसे 'नया व्यवसाय' बताते हुए कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
  • आरोपियों पर क्या आरोप हैं? आरोपियों पर BNS के तहत सड़क निर्माण में बाधा डालने और SC/ST एक्ट के तहत मजदूरों के खिलाफ जातिगत टिप्पणी करने के आरोप हैं।
  • इस मामले में हाई कोर्ट का क्या आदेश था? पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 14 मई 2026 को अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।

स्रोत: www.hindustantimes.com

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