मुख्य तथ्य
तमिलनाडु के पूर्व वित्त मंत्री और DMK नेता थंगम थेन्नारसु ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार को कुड्डालोर जिले के परांकीपेट्टई में भारतीय तेल निगम (IOC) द्वारा प्रस्तावित चार हाइड्रोकार्बन अन्वेषण कुओं को मंजूरी नहीं देनी चाहिए।
विवरण
एक सोशल मीडिया पोस्ट में, थेन्नारसु ने कहा, “मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार ने पर्यावरण और कृषि को संभावित नुकसान के मद्देनजर राज्य में किसी भी हाइड्रोकार्बन परियोजना की अनुमति नहीं देने का फैसला किया था। जब ONGC ने रामनाथपुरम में हाइड्रोकार्बन की उपलब्धता का अध्ययन करने के लिए आवेदन किया था, तो राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण को अनुमति न देने की सलाह दी गई थी।”
थेन्नारसु ने कहा कि राज्य सरकार को परांकीपेट्टई में परियोजनाओं का विरोध करना चाहिए क्योंकि वे प्राकृतिक संसाधनों और मछुआरों की आजीविका को प्रभावित करेंगे। उन्होंने तमिलनाडु राज्य तटीय प्रबंधन प्राधिकरण से भी परियोजना को मंजूरी न देने का आग्रह किया।
प्रभाव
यह कदम तमिलनाडु में हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के खिलाफ बढ़ते विरोध को दर्शाता है, जहां स्थानीय समुदाय और राजनीतिक दल पर्यावरणीय चिंताओं का हवाला देते हैं। मछुआरों का कहना है कि इस तरह की परियोजनाओं से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है और उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- यह मामला पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन को उजागर करता है।
- तमिलनाडु सरकार का रुख अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
- स्थानीय निकायों और प्राधिकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IOC के चार हाइड्रोकार्बन कुएं कहां प्रस्तावित हैं?
ये कुएं कुड्डालोर जिले के परांकीपेट्टई में प्रस्तावित हैं।
DMK सरकार का हाइड्रोकार्बन परियोजनाओं पर क्या रुख है?
DMK सरकार ने पर्यावरण और कृषि को संभावित नुकसान के कारण राज्य में किसी भी हाइड्रोकार्बन परियोजना की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।
थंगम थेन्नारसु ने किस अधिकारी से अपील की?
उन्होंने तमिलनाडु राज्य तटीय प्रबंधन प्राधिकरण से परियोजना को मंजूरी न देने का आग्रह किया।