प्रमुख तथ्य
त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू, जो सबरीमाला मंदिर से कथित सोने की हानि के मामले में आरोपी थे, का 54 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि वह पिछले तीन महीनों से कैंसर का इलाज करा रहे थे और शुक्रवार रात कोच्चि के अमृता अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
मामले का विवरण
मुरारी बाबू को पिछले साल अक्टूबर में सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों से कथित सोने की हानि से संबंधित मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वह द्वारपालक मूर्तियों से सोने की हानि के मामले में दूसरे आरोपी और श्रीकोविल के दरवाजों से सोने की हानि के मामले में छठे आरोपी थे।
आरोप है कि जब मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग का प्रस्ताव रखा, तो बाबू ने उसे TDB के पास भेज दिया। उन पर सोने की हानि से संबंधित साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
कानूनी कार्यवाही
कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने 23 जनवरी 2026 को उन्हें दोनों मामलों में वैधानिक जमानत दे दी थी, क्योंकि गिरफ्तारी के 90 दिन बीत जाने के बाद भी विशेष जांच दल (SIT) आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाया था।
करियर और पृष्ठभूमि
मुरारी बाबू ने अपना करियर केरल पुलिस में कांस्टेबल के रूप में शुरू किया था। उन्होंने 1994 में केरल पुलिस ज्वाइन की और कन्नूर में प्रारंभिक प्रशिक्षण लिया। बाद में वह पुलिस छोड़कर 1997 में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड में शामिल हो गए।
TDB में उन्हें एट्टुमानूर मंदिर में क्लर्क नियुक्त किया गया और बाद में विभिन्न पदों पर कार्य किया। गिरफ्तारी के समय वह हरिपद में उप देवस्वम आयुक्त के पद पर तैनात थे और मामला सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। उन्होंने वैकोम, एट्टुमानूर और तिरुनक्कारा मंदिरों में मंदिर उत्सवों के विशेष अधिकारी के रूप में भी काम किया था।
प्रभाव और आगे की कार्यवाही
मुरारी बाबू की मृत्यु से इस मामले में कानूनी कार्यवाही पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना बाकी है। विशेष जांच दल अभी भी मामले की जांच कर रहा है और मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुरारी बाबू कौन थे?
मुरारी बाबू त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी थे, जो सबरीमाला मंदिर से सोने की हानि के मामले में आरोपी थे।
उनकी मृत्यु कब और कहाँ हुई?
उनकी मृत्यु 12 जून 2026 की रात को कोच्चि के अमृता अस्पताल में कैंसर के इलाज के दौरान हुई।
उन पर क्या आरोप थे?
उन पर सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों से सोने की हानि से संबंधित मामलों में साजिश रचने का आरोप था।