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ईरान संघर्ष विराम और मोदी-ट्रंप वार्ता: भारत की रणनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव

मुख्य तथ्य हिंदुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक शिशिर गुप्ता ने अपने कॉलम ‘पॉइंट ब्लैंक’ में ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के मद्देनजर भारत की रणनीतिक…

मुख्य तथ्य

हिंदुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक शिशिर गुप्ता ने अपने कॉलम 'पॉइंट ब्लैंक' में ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के मद्देनजर भारत की रणनीतिक स्थिति का गहन विश्लेषण किया है। उनका मानना है कि भारत को 'इंडिया फर्स्ट' दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और किसी एक शक्ति के नजरिए से दुनिया को नहीं देखना चाहिए।

ईरान संघर्ष विराम: एक अस्थायी राहत

ईरान और अमेरिका के बीच 19 जून को एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हट जाएगी। यह भारत के लिए राहत की खबर है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है। 16 दिनों के संघर्ष विराम ने पहले ही तेल की कीमतों को कम कर दिया है। हालांकि, शिशिर गुप्ता चेतावनी देते हैं कि यह कोई स्थायी शांति समझौता नहीं है, बल्कि परमाणु वार्ता के लिए 60 दिनों की सांस है। असली चुनौती ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करना है।

परमाणु मुद्दे की तीन परतें

गुप्ता के अनुसार, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, और प्रॉक्सी नेटवर्क (हिजबुल्लाह, हूती, कताइब हिजबुल्लाह) तीन मुख्य मुद्दे हैं। जब तक इनका समाधान नहीं होता, किसी भी समझौते को जश्न मनाना जल्दबाजी होगी।

यूरेनियम का भंडारण: रूस की भूमिका विवादास्पद

एक दिलचस्प पहलू यह है कि क्या कोई तीसरा देश ईरान के समृद्ध यूरेनियम को अपने पास रख सकता है। रूस ने ऐसा करने की पेशकश की है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पास रहे, न कि किसी प्रतिद्वंद्वी महाशक्ति के पास।

मोदी-ट्रंप वार्ता: एजेंडा और चुनौतियां

प्रधानमंत्री मोदी की ट्रंप से मुलाकात G7 शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। मुख्य मुद्दे होंगे:

  • ईरान समझौता: मोदी अमेरिकी दृष्टिकोण को समझना चाहेंगे ताकि भारत अपनी ऊर्जा और क्षेत्रीय नीति को समायोजित कर सके।
  • व्यापार शुल्क: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 12.5% टैरिफ लगाया है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों पर 10% है। भारत समान प्रतिस्पर्धी टैरिफ चाहता है।
  • भारतीय नाविकों की मौत: ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए। विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे 'अनुचित' बताया, जबकि अमेरिका का कहना है कि टैंकर ने नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश की।

इसके अलावा, F404 इंजन की आपूर्ति और रणनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

पाकिस्तान की भूमिका: सीमित और अस्थायी

पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका वार्ता में मध्यस्थता करके अपनी कूटनीतिक भूमिका बढ़ाई है। वह इसका उपयोग अमेरिका से सैन्य उपकरण, IMF से ऋण, और FATF में राहत पाने के लिए कर सकता है। लेकिन गुप्ता के अनुसार, यह स्थिति अस्थायी है। यदि ईरान का परमाणु मुद्दा हल हो जाता है, तो अमेरिका का ध्यान चीन और रूस पर केंद्रित हो जाएगा।

'इंडिया फर्स्ट': नई रणनीति की जरूरत

गुप्ता का तर्क है कि भारत को अमेरिका, चीन या रूस के चश्मे से दुनिया नहीं देखनी चाहिए। 1962, डोकलाम और 2020 के सीमा संकटों ने सिखाया कि अंततः भारत को अपनी सीमाओं पर अकेला खड़ा होना पड़ता है। इसलिए, भारत को रूसी तेल खरीदना चाहिए, पाकिस्तान और चीन के सैन्य अधिग्रहणों का मुकाबला करना चाहिए, और घरेलू रक्षा उत्पादन पर जोर देना चाहिए।

गुप्ता ट्रंप को इस आत्मनिरीक्षण का श्रेय देते हैं कि उन्होंने टैरिफ और दबाव के माध्यम से भारत को यह स्वीकार करने पर मजबूर किया कि वह बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर नहीं रह सकता।

FAQ

ईरान संघर्ष विराम से भारत को क्या लाभ?

भारत को गल्फ तेल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी और तेल की कीमतों में गिरावट से आर्थिक राहत मिलेगी।

मोदी-ट्रंप वार्ता में मुख्य मुद्दे क्या होंगे?

ईरान समझौता, व्यापार शुल्क, और ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की मौत पर चर्चा होगी।

'इंडिया फर्स्ट' नीति का क्या अर्थ है?

भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि अमेरिका, चीन या रूस के नजरिए से दुनिया को देखना चाहिए।

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