मुख्य तथ्य
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को यूथ कांग्रेस नेता एस.पी. शुहैब की हत्या के मामले में उनके पिता को आरोपियों द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका में पक्षकार बनने की अनुमति दे दी। शुहैब, जो एडयन्नूर के रहने वाले थे, की फरवरी 2018 में कथित तौर पर CPI(M) कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी थी।
मामले का विवरण
आरोपियों, जिनमें पूर्व DYFI कार्यकर्ता अकाश थिल्लेनकेरी भी शामिल है, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले को वर्तमान थलास्सेरी अतिरिक्त सत्र न्यायालय से स्थानांतरित करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि उन्हें ट्रायल कोर्ट से न्याय नहीं मिलेगा। इससे पहले हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी जब तक कि स्थानांतरण याचिका का निपटारा न हो जाए।
अदालत का आदेश
न्यायमूर्ति जी. गिरीश ने शुहैब के पिता को पक्षकार बनने की अनुमति देने के साथ-साथ राज्य के उस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया जिसमें आरोपियों द्वारा ट्रायल कोर्ट की जांच प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक अन्य लंबित याचिका को इससे जोड़ने की मांग की गई थी। इस याचिका में हाईकोर्ट ने थलास्सेरी कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें आरोपियों की जमानत रद्द कर दी गई थी।
पृष्ठभूमि
थलास्सेरी कोर्ट ने पहले आरोपियों के उस अनुरोध को खारिज कर दिया था जिसमें वे गवाहों के आचरण को रिकॉर्ड करने की मांग कर रहे थे ताकि यह साबित किया जा सके कि गवाहों को अभियोजन द्वारा तैयार किया गया था। इसके बाद आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के समक्ष यह भी कहा था कि जब तक मामले का समाधान नहीं हो जाता, वे कार्यवाही में सहयोग नहीं कर सकते। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
प्रभाव और आगे की राह
इस आदेश से शुहैब के परिवार को मामले में अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अब हाईकोर्ट स्थानांतरण याचिका और संबंधित मुद्दों पर सुनवाई करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शुहैब हत्याकांड क्या है?
एस.पी. शुहैब केरल के एडयन्नूर में यूथ कांग्रेस के नेता थे, जिनकी फरवरी 2018 में कथित तौर पर CPI(M) कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी थी।
आरोपियों ने मामला स्थानांतरित करने की याचिका क्यों दायर की?
आरोपियों का कहना है कि उन्हें थलास्सेरी की अतिरिक्त सत्र न्यायालय से न्याय नहीं मिलेगा, इसलिए उन्होंने मामला दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति जी. गिरीश ने शुहैब के पिता को याचिका में पक्षकार बनने की अनुमति दी और राज्य की एक अन्य याचिका को भी इससे जोड़ा।
स्रोत: www.thehindu.com