मुख्य तथ्य
उत्तर प्रदेश के जेवर तहसील में यमुना एक्सप्रेसवे पर बस सेवा की कमी के कारण ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। दयानतपुर गांव के निवासी दीवान सिंह और संता देवी जैसे लोगों को 25 फीट ऊंची ढलान चढ़कर एक्सप्रेसवे तक पहुंचना पड़ता है, जहां वाहनों की रफ्तार 100 किमी/घंटा तक होती है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में उद्घाटित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बावजूद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई है।
विस्तृत जानकारी
दीवान सिंह और संता देवी, जो चालीस वर्षीय दंपति हैं, को अपने गांव दयानतपुर से अलीगढ़ जाने के लिए रोजाना यह खतरनाक सफर करना पड़ता है। वे बताते हैं कि एक्सप्रेसवे पर कोई आधिकारिक बस स्टॉप नहीं है, जिससे उन्हें अनाधिकृत स्थानों से बस पकड़नी पड़ती है। यह समस्या केवल दयानतपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि जेवर तहसील के कई गांवों के निवासी इससे प्रभावित हैं।
प्रभाव
इस खराब परिवहन व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को न सिर्फ शारीरिक कष्ट उठाना पड़ता है, बल्कि उनकी जान को भी खतरा रहता है। एक्सप्रेसवे पर पैदल चलना प्रतिबंधित है, फिर भी लोगों को मजबूरन ऐसा करना पड़ता है। दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह मामला स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग का ध्यान आकर्षित करता है। ग्रामीणों की सुरक्षा और सुविधा के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर आधिकारिक बस स्टॉप और सुरक्षित पैदल मार्ग की व्यवस्था होनी चाहिए। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजना के बावजूद आसपास के गांवों की बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी चिंताजनक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जेवर के ग्रामीणों को बस पकड़ने में क्या दिक्कत हो रही है?
यमुना एक्सप्रेसवे पर कोई आधिकारिक बस स्टॉप नहीं है, जिससे ग्रामीणों को 25 फीट ऊंची ढलान चढ़कर और तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करनी पड़ती है।
यह समस्या किन गांवों को प्रभावित कर रही है?
जेवर तहसील के दयानतपुर सहित आसपास के गांवों के निवासी इस समस्या से जूझ रहे हैं।
क्या सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कोई कदम उठाया है?
अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, हालांकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद भी सार्वजनिक परिवहन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
स्रोत: www.thehindu.com