Desh Duniya | अमेरिकी नौसेना

अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत: भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया

प्रमुख तथ्य अमेरिकी नौसेना द्वारा फारस की खाड़ी में किए गए मिसाइल हमलों में तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं। ये हमले 8, 10 और 11 जून को हुए, जिनमें तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना…

प्रमुख तथ्य

अमेरिकी नौसेना द्वारा फारस की खाड़ी में किए गए मिसाइल हमलों में तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं। ये हमले 8, 10 और 11 जून को हुए, जिनमें तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और अमेरिकी प्रशासन से जवाब मांगा है।

हमले का विवरण

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) के अनुसार, हमले हेलफायर मिसाइलों से किए गए। तीन जहाजों - एमटी एसेंशन, एमटी पेट्रोल ऑयलर और एमटी डेल्टा - पर हमला हुआ। पहले दो जहाजों पर कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन एमटी डेल्टा पर तीन भारतीय नाविक मारे गए। यह जहाज ओमान के तट से लगभग 400 समुद्री मील दूर डुक्म के पास था।

भारत की प्रतिक्रिया

12 जून को भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि जेसन मीक्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की और कहा, "मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत के कड़े विरोध को दोहराया, जिसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए। वाणिज्यिक शिपिंग के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है।" रुबियो ने जवाब दिया कि अमेरिकी नाकाबंदी और ईरानी तेल के अवैध परिवहन का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारतीय नाविकों की स्थिति

दुनिया भर में लगभग 3.5 लाख भारतीय नाविक कार्यरत हैं, जिनमें से आधे से अधिक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर हैं। फारस की खाड़ी क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नाविक सेवारत हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं।

जहाजों की स्थिति और विवाद

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि इन जहाजों ने निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरानी तेल ले जा रहे थे। हालांकि, जहाज प्रबंधक कंपनी IOS Marine FZE ने इन आरोपों का खंडन किया है। कंपनी का कहना है कि जहाज 10 दिनों से स्थिर था और उसे अमेरिकी नौसेना से कोई संचार नहीं मिला। ये जहाज विदेशी झंडे (पनामा, मार्शल द्वीप, लाइबेरिया) के तहत चल रहे थे, लेकिन उनका भारतीय स्वामित्व और प्रबंधन था।

भारत के विकल्प सीमित

भारत ने हूती हमलों से निपटने के लिए ऑपरेशन संकल्प शुरू किया था और 2024 में चार वाणिज्यिक जहाजों की रक्षा की थी। लेकिन फारस की खाड़ी में विरोधी अमेरिका और ईरान हैं, जिससे भारत के विकल्प सीमित हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत कोई सर्वोच्च प्रवर्तन निकाय नहीं है, और IMO भी प्रभावी कार्रवाई करने में असमर्थ रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी नौसेना ने भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमला क्यों किया?

अमेरिका का आरोप है कि ये जहाज ईरानी तेल का अवैध परिवहन कर रहे थे और अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहे थे।

हमले में कितने भारतीय नाविक मारे गए?

हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए - एक चीफ इंजीनियर, एक इंजन फिटर और एक डेक कैडेट।

भारत सरकार ने इस घटना पर क्या कदम उठाया?

भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो से बात की।

स्रोत: www.thehindu.com

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