Trinamool Congress के बागी सांसदों का नई पार्टी में विलय
कोलकाता: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के 20 बागी सांसदों ने रविवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (Nationalist Citizens Party) में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम ने पार्टी को एक बड़ा झटका दिया है, खासकर तब जब पार्टी विधानसभा चुनाव में हार और कानूनी चुनौतियों से जूझ रही है।
बागी सांसदों का दावा: दो-तिहाई बहुमत
बागी गुट का नेतृत्व कर रही काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) ने कहा, "हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। हम एनडीए (NDA) का हिस्सा होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई में वे तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिन्ह अपने पक्ष में मांगेंगे, क्योंकि उनके पास पार्टी के दो-तिहाई सांसद हैं।
तृणमूल की प्रतिक्रिया: 'धोखा'
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा (Madan Mitra) ने इस कदम को "धोखा" बताया। उन्होंने कहा, "उन्होंने तृणमूल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था, यह कहते हुए कि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं। अब वे अपने वादे से मुकर गए हैं। यह धोखा है।" मित्रा ने यह भी कहा कि कानूनी कार्रवाई ममता बनर्जी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
दलबदल विरोधी कानून का पेंच
बागी सांसदों का दावा है कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत होने के कारण वे दलबदल विरोधी कानून (anti-defection law) के दायरे में नहीं आते। हालांकि, मदन मित्रा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा, "यह एक नई पार्टी बनाने के लिए बहुत छोटी संख्या है। कई प्रक्रियाएं हैं। यह तो सिर्फ शुरुआत है।"
सुभाष चंद्र बोस का जिक्र
मदन मित्रा ने बागी सांसदों पर तंज कसते हुए कहा, "सुभाष चंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक (Forward Bloc) बनाया था। उस तरफ कोई सुभाष बोस नहीं है।" यह टिप्पणी तब आई जब किसी ने कहा कि बागियों ने कोई नई पार्टी नहीं बनाई है।
आगे की रणनीति
बागी सांसदों में से एक सुदीप बंद्योपाध्याय (Sudip Bandyopadhyay) ने कहा, "जब आप पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों के साथ जाते हैं, तो आप पहले दिन पार्टी का नाम नहीं मांग सकते... जुलाई में हम तृणमूल (नाम) देने की मांग करेंगे, क्योंकि हमारे पास तृणमूल से दो-तिहाई बहुमत है। तब अदालत फैसला करेगी।"
क्या है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस में विद्रोह की शुरुआत विधानसभा चुनाव में हार के बाद हुई थी। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) को पत्र लिखकर अपने दो-तिहाई बहुमत का दावा किया था। इसके बाद उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में शामिल होने का फैसला किया, जो एक छोटी पार्टी है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए उठाया गया है।
FAQ
बागी सांसदों ने किस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है?
बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (Nationalist Citizens Party) में शामिल होने का फैसला किया है।
क्या बागी सांसदों पर दलबदल विरोधी कानून लागू होगा?
बागी सांसदों का दावा है कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है, जो उन्हें दलबदल विरोधी कानून से छूट देता है।
ममता बनर्जी की पार्टी इस पर क्या कह रही है?
वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने इसे धोखा बताया है और कहा है कि कानूनी कार्रवाई ममता बनर्जी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
Source: www.ndtv.com