मुख्य तथ्य
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देवनहल्ली में बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण 'प्रगति पथ यात्रा दर्शन' कार्यक्रम के तहत किया गया।
परियोजना का विवरण
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना चरण-I के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बेंगलुरु और चेन्नई के बीच हाई-स्पीड और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान करना है। कर्नाटक खंड 71 किमी लंबा है और इसे तीन पैकेजों में बांटा गया है: हॉस्कोट-मालूर (26.4 किमी), मालूर-बंगारपेट (27.1 किमी) और बंगारपेट-बेथमंगला (17.5 किमी)।
प्रभाव और लाभ
वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी और नागरिकों के जीवन में सुधार होगा। यह हॉस्कोट, मालूर, बंगारपेट, नरसापुरा औद्योगिक क्षेत्र और एयरोस्पेस एवं रक्षा पार्कों जैसे प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हबों से कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।
इसके अलावा, यह परियोजना डोब्बस्पेट में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क तक बेंगलुरु रिंग रोड नेटवर्क के माध्यम से पहुंच में सुधार करेगी।
वर्तमान स्थिति
बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे को चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे के तहत प्राथमिकता वाला गलियारा माना गया है। यह परियोजना कर्नाटक में एनएच-4 और एनएच-207 के जंक्शन के पास हॉस्कोट से शुरू होती है। कर्नाटक खंड दिसंबर 2024 में पूरा हो गया था और अनौपचारिक रूप से वाहनों के लिए खोल दिया गया था, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के खंडों का निर्माण जारी है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- यह एक्सप्रेसवे बेंगलुरु और चेन्नई के बीच यात्रा समय को काफी कम करेगा।
- इससे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ होगा।
- यह परियोजना भारतमाला योजना के तहत देश में बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
कर्नाटक खंड की लंबाई 71 किमी है, जिसमें तीन पैकेज शामिल हैं। पूरे एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 262 किमी होगी।
यह एक्सप्रेसवे किन-किन शहरों को जोड़ेगा?
यह बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ेगा और हॉस्कोट, मालूर, बंगारपेट, नरसापुरा औद्योगिक क्षेत्र, एयरोस्पेस एवं रक्षा पार्कों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
इस परियोजना का क्या महत्व है?
यह चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे का हिस्सा है और आर्थिक विकास, रोजगार सृजन तथा लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देगा।
स्रोत: www.thehindu.com