मुख्य तथ्य
केंद्रपाड़ा जिले के कुसुनपुर गांव में मानव-मगरमच्छ संघर्ष के 20 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। CSIR ने यहां AI आधारित चेतावनी प्रणाली लगाने का निर्णय लिया है।
विस्तार से जानकारी
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) अपनी 'स्मार्ट विलेज' पहल के तहत ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के कुसुनपुर गांव में AI-सक्षम वन्यजीव पहचान और चेतावनी प्रणाली स्थापित करने जा रही है। यह प्रणाली गांव के दो मुख्य प्रवेश बिंदुओं पर लगाई जाएगी, जिससे निवासियों को मगरमच्छ जैसे खतरनाक जानवरों के आने की सूचना मिल सकेगी।
केंद्रपाड़ा में पिछले चार वर्षों में मानव-मगरमच्छ संघर्ष के 20 से अधिक मामले सामने आए हैं, जो राज्य में सबसे खराब दरों में से एक है।
बुनियादी ढांचे का उन्नयन
इस परियोजना के तहत गांव में कई बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- जल गेट सुविधा का नवीनीकरण
- भूमिगत जल निकासी प्रणाली
- सामुदायिक भवन का पुनर्निर्माण
- सामुदायिक शौचालय
- शवदाह गृह का नवीनीकरण
- कोल्ड मिक्स तकनीक, वेस्ट प्लास्टिक रोड तकनीक और सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मिश्रण से सड़कों का विकास
हरित आजीविका और रोजगार के अवसर
कुसुनपुर को हरित आजीविका का केंद्र बनाने की योजना है। इस पहल से हरित नौकरियां पैदा होंगी और स्थानीय उद्यमियों को टिकाऊ व्यवसाय के अवसर मिलेंगे। CSIR की 'लैब टू लैंड' नीति के तहत कई तकनीकों को लागू किया जाएगा, जैसे:
- ड्राई फ्लावर प्रोसेसिंग
- फ्रीज-ड्राईंग से क्रिस्पी फल उत्पादन
- कुपोषण से निपटने के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थ
- बायोडिग्रेडेबल टेबलवेयर
- हर्बल फ्लोर क्लीनिंग लिक्विड
- मच्छर प्रतिरोधी लोशन
- प्राकृतिक मोम से सुगंधित मोमबत्तियां
- ईंट और ब्लॉक बनाने की मशीनें
- गांव स्तरीय चावल और मूंग दाल मिलिंग इकाइयां
- वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया गया पारबॉइल्ड चावल प्रसंस्करण संयंत्र
वैज्ञानिकों के बयान
CSIR-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) के निदेशक प्रदीप कुमार रामानचार्ला ने कहा, "अगले तीन वर्षों में 17 CSIR प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिक कुसुनपुर का दौरा करेंगे ताकि इन तकनीकों का सुचारू रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।"
उन्होंने आगे कहा, "स्मार्ट गांव बनाने का मूल तर्क उन्हें भारत की विकास गाथा में शामिल करना है। भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन शीर्ष दो अर्थव्यवस्थाओं से काफी पीछे है। इस अंतर को पाटने के लिए सभी क्षेत्रों के योगदान की आवश्यकता है। फिलहाल शहरी केंद्र रोजगार और आर्थिक विकास के प्रमुख चालक हैं, लेकिन गांवों को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।"
CSIR-खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान (IMMT), भुवनेश्वर के निदेशक रामानुज नारायण ने कहा कि उनकी प्रयोगशाला कुसुनपुर के लिए टिकाऊ जल फिल्टर और धुआं रहित चूल्हे उपलब्ध कराएगी।
CBRI के प्रधान वैज्ञानिक और कुसुनपुर में 'स्मार्ट विलेज' पहल के नोडल अधिकारी किशोर एस. कुलकर्णी ने बताया कि प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण, आवश्यकता मूल्यांकन और ग्रामीणों के साथ परामर्श पूरा हो चुका है।
FAQ
कुसुनपुर गांव में किस तरह का AI सिस्टम लगाया जाएगा?
AI-सक्षम वन्यजीव पहचान और चेतावनी प्रणाली लगाई जाएगी, जो मगरमच्छ जैसे जानवरों के आने पर अलर्ट देगी।
यह AI सिस्टम कहां स्थापित किया जाएगा?
गांव के दो मुख्य प्रवेश बिंदुओं पर यह सिस्टम लगाया जाएगा।
स्मार्ट विलेज परियोजना के तहत अन्य क्या विकास कार्य होंगे?
जल गेट, भूमिगत जल निकासी, सामुदायिक भवन, शौचालय, शवदाह गृह, सड़कें, और हरित आजीविका से जुड़ी कई परियोजनाएं शामिल हैं।
इस परियोजना में कितने CSIR प्रयोगशालाएं शामिल हैं?
17 CSIR प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिक अगले तीन वर्षों में कुसुनपुर का दौरा करेंगे।
स्रोत: www.thehindu.com