प्रमुख तथ्य
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया। यह कदम उस विवाद के बाद उठाया गया जो पिछले साल मार्च में उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित रूप से अधजली नकदी बरामद होने के बाद शुरू हुआ था।
पूरा मामला
न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने इस्तीफा पत्र में लिखा, "हालांकि मैं आपके उच्च कार्यालय पर उन कारणों का बोझ नहीं डालना चाहता जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया, लेकिन गहरी पीड़ा के साथ मैं अपना इस्तीफा प्रस्तुत करता हूं।" उन्होंने आगे कहा, "इस पद पर सेवा करना सम्मान की बात थी।"
यह घटना 14 मार्च 2025 की रात की है, जब न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे। उनके सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मियों ने कथित तौर पर एक स्टोररूम में अधजले नोटों के ढेर देखे। इसके बाद से ही उन पर जांच और सवालों का दौर शुरू हो गया था।
प्रभाव और आगे की कार्रवाई
इस्तीफे के बाद अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रपति के विचाराधीन है। न्यायपालिका की छवि पर इस घटना के प्रभाव को देखते हुए आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दिया है।
- इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा गया।
- यह विवाद मार्च 2025 में उनके दिल्ली आवास से अधजली नकदी मिलने से जुड़ा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Justice Yashwant Varma ने इस्तीफा क्यों दिया?
उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित तौर पर अधजली नकदी बरामद होने के बाद विवाद बढ़ने पर उन्होंने इस्तीफा दिया।
कब और किसे इस्तीफा भेजा गया?
9 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा पत्र भेजा गया।
क्या यह पहली घटना थी?
नहीं, 14 मार्च 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते हुए उनके आवास पर आग लगने के बाद अधजली नकदी मिली थी।