प्रमुख तथ्य
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे आंतरिक संकट के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंद्योपाध्याय ने पार्टी को गुमराह किया और अपनी लोकेशन के बारे में झूठ बोला, जबकि वे दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिल रहे थे। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब TMC के कई सांसद और विधायक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर रहे हैं।
विवाद की शुरुआत
सूत्रों के अनुसार, सुदीप बंद्योपाध्याय और विद्रोही सांसद सताब्दी रॉय ने शनिवार को भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस बैठक के बाद अटकलें तेज हो गईं कि विद्रोही गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग कर सकता है।
महुआ मोइत्रा का हमला
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, "उनका मुखौटा और उनका विग दोनों उतर गए - सुदीप बंद्योपाध्याय ने हमें बताया कि वे पेट की बीमारी के कारण कोलकाता के अपोलो अस्पताल में हैं, जबकि हमने अचानक उन्हें दिल्ली में भूपेंद्र यादव के घर पर टीवी पर देखा। दादा, कृपया अपना X हैंडल कम से कम @SudipBJPBTeam कर लें। हमारा नाम इस्तेमाल न करें।"
कुणाल घोष का बयान
महुआ मोइत्रा के अलावा, TMC नेता कुणाल घोष ने भी बंद्योपाध्याय पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "ममता दीदी ने इन लोगों को पद और सम्मान दिया, और ये लोग बदले में यह दे रहे हैं। सुदीप बंद्योपाध्याय का पार्टी बदलने का इतिहास रहा है।" घोष ने यह भी दावा किया कि बंद्योपाध्याय ने अपना राजनीतिक करियर ममता बनर्जी को गुमराह करके बनाया है और उन्होंने पहले भी पार्टी के भीतर उनके बारे में चिंता जताई थी।
पार्टी की कार्रवाई
बंद्योपाध्याय की भूपेंद्र यादव से मुलाकात के कुछ घंटों बाद, TMC ने उन्हें उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से हटा दिया और उनकी जगह कुणाल घोष को नियुक्त कर दिया। यह कदम पार्टी में बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाता है।
विद्रोह का आकार
पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 अब तक अलग संसदीय समूह बनाने के समर्थन में एकजुट हो चुके हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में 80 में से 64 विधायकों ने रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सोवनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता नियुक्त करने के फैसले का विरोध किया है।
आगे की संभावनाएं
एक सूत्र ने कहा, "विद्रोही सांसद विधानसभा और संसद दोनों में अपनी विधायी ताकत के आधार पर असली TMC के रूप में मान्यता का दावा कर रहे हैं। बेशक, अध्यक्ष का फैसला अंतिम होगा।" यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और क्या TMC में और दरार पड़ती है।
FAQ
क्या है TMC में विद्रोह का कारण?
TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 ने अलग संसदीय समूह बनाने का समर्थन किया है, जबकि विधानसभा में 80 में से 64 विधायक ममता बनर्जी के फैसले के खिलाफ हैं।
सुदीप बंद्योपाध्याय पर महुआ मोइत्रा ने क्या आरोप लगाया?
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने पार्टी को बताया कि वे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में पेट की बीमारी के कारण भर्ती हैं, जबकि वे दिल्ली में भूपेंद्र यादव के घर पर टीवी पर दिखे।
सुदीप बंद्योपाध्याय की BJP नेता से मुलाकात का क्या असर हुआ?
मुलाकात के कुछ घंटों बाद TMC ने बंद्योपाध्याय को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से हटाकर कुणाल घोष को नियुक्त कर दिया।