मुख्य तथ्य
बिहार की चार महिला शिल्पकारों — राम दुलारी देवी, रूबी देवी, अंजलि कुमारी और प्रियांजलि कुमारी — ने हाल ही में बेंगलुरु के कामराज रोड स्थित SABHA में अपनी कला का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शनी MAATI (Mithila Art Artisan Transformative Initiative) नामक पहल के तहत आयोजित की गई, जो टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थित है।
विस्तार से
MAATI कार्यक्रम का उद्देश्य महिला शिल्पकारों को केवल कलाकार नहीं, बल्कि उद्यमी बनाना है। इसके तहत उन्हें मूल्य निर्धारण, विपणन, व्यवसाय प्रबंधन और ब्रांडिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। कार्यक्रम की निदेशक पल्लवी कौर के अनुसार, जब महिलाएं अपने स्वयं के लोगो और ब्रांड पहचान बनाती हैं, तो वे स्वामित्व की भावना विकसित करती हैं।
प्रभाव
इस पहल ने शिल्पकारों के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव लाया है। 50 वर्षीय राम दुलारी देवी कहती हैं, “MAATI के साथ, मैं नए डिज़ाइन बनाती हूं और अपनी तकनीक के साथ प्रयोग करती हूं। पहले कभी इतनी सोच-समझकर यह कला नहीं की थी।” प्रियांजलि कुमारी ने कहा, “हमें विश्वास नहीं हो रहा कि हम यहां खड़ी हैं और लोग हमारी कला को देख रहे हैं।”
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह प्रदर्शनी दर्शाती है कि पारंपरिक शिल्प कैसे अपनी जड़ों को खोए बिना विकसित हो सकता है। शास्त्रीय मधुबनी रूपांकनों के साथ-साथ बिहार के परिदृश्य से प्रेरित समकालीन व्याख्याएं भी प्रस्तुत की गईं। पारंपरिक तकनीकों को अब टेबल क्लॉथ और बेड कवर जैसे नए उत्पादों पर लागू किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- MAATI पहल क्या है? MAATI (Mithila Art Artisan Transformative Initiative) एक कार्यक्रम है जो टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थित है और बिहार की महिला शिल्पकारों को मिथिला पेंटिंग के माध्यम से उद्यमिता कौशल प्रदान करता है।
- इस प्रदर्शनी में किन कलाकृतियों को शामिल किया गया? प्रदर्शनी में हाथ से चित्रित वस्त्र, दीवार कला, टेबल कवर और घरेलू सजावट की वस्तुएं शामिल थीं, जो पारंपरिक मिथिला चित्रकला पर आधारित थीं।
- इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य महिलाओं को मूल्य निर्धारण, विपणन, व्यवसाय प्रबंधन और ब्रांडिंग में प्रशिक्षित करके उन्हें स्वतंत्र आजीविका और सामूहिक उद्यम चलाने में सक्षम बनाना है।
स्रोत: www.thehindu.com