मुख्य तथ्य
भारत के चीन में राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने गुरुवार (12 जून, 2026) को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी ल्हासा पहुंचकर कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया। यह मई 2026 में पदभार संभालने के बाद तिब्बत की उनकी पहली यात्रा है।
यात्रा का विवरण
भारतीय दूतावास के अनुसार, राजदूत दोराईस्वामी और उनके सहयोगी तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मिले। झाओ पेंग ने तीर्थयात्रियों के लिए की गई सुविधाओं और तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद राजदूत ने झाओ पेंग के साथ रात्रिभोज में भाग लिया।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का इतिहास
यह यात्रा विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित की जाती है। 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण इसे रोक दिया गया था, और बाद में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के कारण भी इसे स्थगित रखा गया। जून 2025 में पांच साल के अंतराल के बाद इसे फिर से शुरू किया गया।
राजनयिक महत्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में पहला कदम था। यह 2024 में रूस के कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद संभव हुआ।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत है।
- तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है।
- यात्रा इसी महीने के अंत में शुरू होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भारतीय राजदूत ने तिब्बत का दौरा क्यों किया?
भारतीय राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए स्थानीय अधिकारियों द्वारा की गई तैयारियों का जायजा लेने के लिए तिब्बत का दौरा किया।
कैलाश मानसरोवर यात्रा कब शुरू हुई थी और कब बंद हुई?
यह यात्रा 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण बंद कर दी गई थी और बाद में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के कारण भी स्थगित रही। जून 2025 में पांच साल के अंतराल के बाद इसे फिर से शुरू किया गया।
इस यात्रा के राजनयिक महत्व क्या हैं?
यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत है, जो 2024 में कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद हुआ।
स्रोत: www.thehindu.com