Desh Duniya | ई-रोल फ्रीज

कर्नाटक में मतदाता सूची से 12% मतदाताओं के हटाए जाने का अनुमान

मुख्य तथ्य कर्नाटक में मतदाता सूची के पूर्व-विशेष गहन संशोधन (Pre-SIR) मैपिंग के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं। राजनीतिक समूहों और कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) के रिकॉर्ड की जांच करने के बाद…

मुख्य तथ्य

कर्नाटक में मतदाता सूची के पूर्व-विशेष गहन संशोधन (Pre-SIR) मैपिंग के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं। राजनीतिक समूहों और कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) के रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अनुमान लगाया है कि संशोधन प्रक्रिया में लगभग 12% मतदाताओं को हटाया जा सकता है। यह अनुमान अन्य राज्यों में देखे गए रुझानों और समीक्षा किए गए दस्तावेजों पर आधारित है, जैसा कि जागृता कर्नाटका के सदस्यों ने बताया। राष्ट्रीय स्तर पर औसत हटाने की दर 10-12% रही है, केरल इसका अपवाद है।

विस्तृत जानकारी

ई-रोल फ्रीज और प्रक्रिया

चुनाव आयोग 16 जून को ई-रोल (डिजिटल मतदाता सूची) फ्रीज करेगा। फ्रीज होने से पहले फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 के तहत सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाएगा। ये फॉर्म क्रमशः नए मतदाता जोड़ने, प्रवासी भारतीयों के पंजीकरण, मतदाता सूची में आपत्ति और विवरण सुधार के लिए हैं। फ्रीज के बाद यह अगले संशोधन चरण का आधार होगा।

महिला मतदाताओं की समस्या

स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता आईडी हटाए जाने का एक बड़ा कारण हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि शादी के बाद विवरण बदलने वाली महिला मतदाताओं के मैपिंग में कठिनाई हुई है। यह समस्या विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे पड़ोसी राज्यों से आने-जाने वाली महिलाओं में देखी गई है, जहां विभिन्न स्थानों पर रिकॉर्ड लिंक करना चुनौतीपूर्ण रहा।

तार्किक विसंगतियां

जागृता कर्नाटका ने 'तार्किक विसंगतियों' (logical discrepancies) की श्रेणी पर चिंता जताई है। पश्चिम बंगाल में इस श्रेणी के तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट (ASDD) श्रेणी से अधिक मतदाताओं को हटाया गया। संगठन का कहना है कि इस श्रेणी की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, जिससे मनमानी जांच हो सकती है। तुमकुर जिले में एक BLO ने 138 महिलाओं को उनके ससुर से लिंक किया, जबकि ससुर मैपिंग के लिए निर्धारित विकल्पों में नहीं है। बेंगलुरु में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) में स्थिति

GBA के मुख्य आयुक्त और जिला चुनाव अधिकारी एम. महेश्वर राव ने कहा कि 28% मतदाताओं का मैपिंग नहीं हो सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-मैपिंग का मतलब स्वतः हटाना नहीं है, लेकिन ऐसे मतदाताओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए दस्तावेज देने होंगे।

प्रवासी श्रमिकों की चुनौती

जागृता कर्नाटका के सदस्यों का कहना है कि समस्या डुप्लिकेट प्रविष्टियों से परे है। पिछले तीन दशकों में प्रवास के कारण, विशेषकर उत्तर कर्नाटक के कई जिलों से आए प्रवासी श्रमिकों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं या विभिन्न रिकॉर्ड में नाम और वर्तनी भिन्न हैं। BLO ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा, तो उन्हें निर्देशात्मक वीडियो देखने और अभ्यास पूरा करने की सलाह दी गई।

प्रभाव और महत्व

यह मुद्दा कर्नाटक में मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता को लेकर चिंता पैदा करता है। बड़ी संख्या में मतदाताओं के हटाए जाने से चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबु कुमार ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने तक ऐसा कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • यदि आप कर्नाटक के मतदाता हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपका नाम मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज है।
  • यदि आपने हाल ही में स्थान बदला है या विवाह किया है, तो फॉर्म 8 के माध्यम से विवरण अपडेट करें।
  • मतदाता सूची में किसी भी विसंगति के लिए स्थानीय BLO या चुनाव कार्यालय से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में कितने प्रतिशत मतदाताओं के हटाए जाने का अनुमान है?

जागृता कर्नाटका के अनुसार, लगभग 12% मतदाताओं के हटाए जाने का अनुमान है।

मतदाता सूची कब फ्रीज होगी?

चुनाव आयोग 16 जून को ई-रोल फ्रीज करेगा।

महिला मतदाताओं के मैपिंग में क्या समस्या है?

शादी के बाद नाम बदलने के कारण महिला मतदाताओं का पड़ोसी राज्यों से लिंक करना मुश्किल हो रहा है।

तार्किक विसंगति क्या है?

यह एक श्रेणी है जिसमें मतदाता विवरण में तार्किक असंगतियों को चिह्नित किया जाता है, लेकिन इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है।

स्रोत: www.thehindu.com

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