मुख्य तथ्य
भारत में हजारों लोग AI रोबोट को प्रशिक्षित करने के लिए घरेलू कामों के वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। ये वीडियो रोबोट को मानवीय हरकतें सीखने में मदद करते हैं, लेकिन भविष्य में इन्हीं लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
विस्तार से जानकारी
चेन्नई की 25 वर्षीय गृहिणी नागिरेड्डी श्रीराम्यचंद्र अपने सिर पर स्मार्टफोन बांधकर आम काटने का वीडियो रिकॉर्ड करती हैं। इस काम के लिए उन्हें प्रति घंटे 250 रुपये मिलते हैं। वह कहती हैं, 'घर के कामों के लिए इतने पैसे और कौन देगा?'
यह डेटा AI कंपनी Objectways को भेजा जाता है, जिसके ग्राहकों में Fortune 500 कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के CEO रवि शंकर बताते हैं कि क्लाइंट कपड़े मोड़ने, कॉफी बनाने और सैंडविच बनाने जैसे कामों के वीडियो मांगते हैं।
प्रभाव
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, 2050 तक दुनिया में एक अरब से अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट हो सकते हैं। भारत सरकार के थिंक-टैंक NITI Aayog ने चेतावनी दी है कि AI से अनौपचारिक क्षेत्र के 490 मिलियन श्रमिकों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- AI प्रशिक्षण का काम फिलहाल रोजगार दे रहा है, लेकिन लंबे समय में यही नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
- भारत सरकार AI के प्रभावों का अध्ययन कर रही है और नीतियां बना रही है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और रोबोट मिलकर काम कर सकते हैं, जैसे भारत में वेल्डर प्राग में रोबोट वेल्डर को मैनेज कर सकता है।
FAQ
AI रोबोट को प्रशिक्षित करने वाले भारतीय श्रमिक कितना कमाते हैं?
घरेलू कामों के वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए उन्हें प्रति घंटे लगभग 250 रुपये मिलते हैं।
क्या AI रोबोट भारत में नौकरियां छीन लेंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटोमेशन से सफेदपोश और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन मानव-रोबोट सहयोग की भी संभावना है।
इस प्रशिक्षण में किस तरह के डेटा का उपयोग होता है?
इसमें 'एगोसेंट्रिक डेटा' यानी पहले व्यक्ति के नजरिए से रिकॉर्ड किए गए वीडियो शामिल हैं, जो रोबोट को मानवीय हरकतें सीखने में मदद करते हैं।
Source: www.thehindu.com