निपाह वायरस: कोझिकोड में मरीज की हालत गंभीर
केरल के कोझिकोड जिले में निपाह वायरस से संक्रमित एक मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है। सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोझिकोड में भर्ती इस मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज के संपर्क में आए 77 लोगों की पहचान कर उनकी निगरानी शुरू कर दी है।
संपर्क ट्रेसिंग और निगरानी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहचाने गए 77 संपर्कों में 58 स्वास्थ्यकर्मी, 14 परिवार के सदस्य और 5 मरीज के दोस्त एवं सहकर्मी शामिल हैं। उच्च जोखिम वाले संपर्कों को क्वारंटीन में रखा गया है और उनके लक्षणों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अब तक किसी भी संपर्क में लक्षण नहीं पाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां
जिला कलेक्टर एम.एस. माधविकुट्टी ने स्वास्थ्य विभाग की टीमों और स्थानीय प्रशासन को निगरानी योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मरीज के रूट मैप के आधार पर रामनट्टुकारा नगर पालिका में रैपिड रिस्पांस टीमों की मदद से कंटेनमेंट उपाय शुरू किए गए हैं। कलेक्टर ने पीपीई किट, ग्लव्स और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
कंट्रोल रूम स्थापित
जिला चिकित्सा कार्यालय में 24x7 कंट्रोल रूम खोला गया है, जहां जनता निपाह वायरस से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान कर सकती है। कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0495-2373901 और 907207767 हैं। यहां प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम जिला चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में काम करेगी।
जनता से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने जनता से घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने और विभाग द्वारा लागू निगरानी उपायों में सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि सभी पहचाने गए संपर्कों की स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और त्वरित कार्रवाई के लिए तैयारी पूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं?
निपाह वायरस के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ और गंभीर मामलों में एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) शामिल हैं।
निपाह वायरस से बचाव के उपाय क्या हैं?
बचाव के लिए संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखें, हाथों को बार-बार धोएं, मास्क पहनें, और फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं। चमगादड़ों या सूअरों के संपर्क से बचें।
क्या निपाह वायरस का इलाज उपलब्ध है?
निपाह वायरस का कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है, लेकिन सहायक देखभाल और लक्षण प्रबंधन से मरीजों को ठीक किया जा सकता है। गंभीर मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है।
स्रोत: www.thehindu.com