परिचय
Nagaland के 19 CBSE-संबद्ध स्कूलों के प्रिंसिपलों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को पत्र लिखकर तीन-भाषा नीति में छूट की मांग की है। यह पत्र 23 मई को भेजा गया था, जिसमें तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत को अनिवार्य करने पर चिंता जताई गई है।
मुख्य तथ्य
- Nagaland में 17 से अधिक प्रमुख जनजातियां हैं, प्रत्येक की अपनी अलग भाषा और मौखिक परंपरा है।
- अंग्रेजी विभिन्न जनजातियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में काम करती है।
- एक कक्षा में 30 से अधिक भाषाई पृष्ठभूमि के छात्र हो सकते हैं।
- अधिकांश स्थानीय भाषाओं के लिए स्कूल स्तर पर पाठ्यपुस्तकें और संरचित पाठ्यक्रम विकसित नहीं हैं।
विस्तृत जानकारी
प्रिंसिपलों ने कहा कि Nagaland एक 'भाषाई रूप से जटिल क्षेत्र' है, इसलिए विशेष छूट या लचीली ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने Ao, Angami, Sumi, Lotha, Konyak जैसी प्रमुख नागा भाषाओं के लिए माध्यमिक स्तर पर संरचित पाठ्यक्रम विकसित करने का अनुरोध किया। साथ ही, राज्य सरकार और शिक्षा मंत्रालय से प्रशिक्षित भाषा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योजना बनाने का आग्रह किया।
एक प्रिंसिपल ने बताया, 'उत्तर-पूर्व भारत मुख्य भूमि से काफी अलग है। Nagaland में हम असमिया, बंगाली और हिंदी का मिश्रण बोलते हैं जिसे Nagamese कहा जाता है। इसकी कोई लिखित लिपि या व्याकरण नहीं है।'
उन्होंने आगे कहा, 'छात्र मुख्य रूप से अंग्रेजी में पढ़ाई करते हैं और काफी हद तक हिंदी भी पढ़ते हैं। लेकिन उन्हें हिंदी में ढलने में कठिनाई होती है, इसलिए वे फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि रोमन लिपि के कारण वे आसान होती हैं।'
एक अन्य चिंता यह है कि जो छात्र कक्षा 1 या 2 से फ्रेंच, जर्मन या स्पेनिश सीख रहे थे, उन्हें अब अचानक बदलाव का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों को केवल सात दिनों का अनुपालन समय दिया गया, जिससे प्रिंसिपल, अभिभावक और छात्र असमंजस में हैं।
प्रभाव और चुनौतियां
पत्र में कहा गया है कि हिंदी को प्रभावी ढंग से पढ़ाना बेहद कठिन है और योग्य शिक्षकों की कमी है। जब शिक्षक उपलब्ध होते हैं, तो वे अक्सर अपनी मातृभाषा के प्रभाव के साथ हिंदी में संवाद करते हैं, जिससे छात्रों को समझने में कठिनाई होती है।
यदि हिंदी एक चुनौती है, तो संस्कृत और भी कठिन है। पत्र में पूछा गया है, 'यदि हिंदी, जो एक जीवित भाषा है, सीखना मुश्किल है, तो अधिकारी वास्तविक रूप से छात्रों से संस्कृत जैसी शास्त्रीय भाषा लेने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?'
प्रिंसिपलों ने कहा कि नीति को ईमानदारी से पूछना चाहिए कि क्या बिना पर्याप्त शिक्षकों और सामग्री के अनिवार्य तीसरी भाषा वास्तव में बच्चों को शिक्षित कर रही है, या केवल एक परीक्षा बाधा जोड़ रही है।
FAQ
Nagaland के CBSE स्कूलों ने तीन-भाषा नीति में छूट क्यों मांगी?
भाषाई विविधता और शिक्षकों की कमी के कारण तीन-भाषा नीति को लागू करना मुश्किल है।
तीन-भाषा नीति के तहत क्या अनिवार्य है?
कक्षा 6 से तीसरी भाषा अनिवार्य है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हों।
Nagaland में कितनी भाषाएं बोली जाती हैं?
17 से अधिक प्रमुख जनजातियां और दर्जनों उप-जनजातियां हैं, प्रत्येक की अपनी भाषा है।
निष्कर्ष
Nagaland के CBSE स्कूलों ने तीन-भाषा नीति में छूट की मांग करते हुए भाषाई विविधता और शिक्षकों की कमी का हवाला दिया है। प्रिंसिपलों ने स्थानीय भाषाओं के लिए पाठ्यक्रम विकसित करने और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति का अनुरोध किया है। यह मुद्दा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और क्षेत्रीय विविधता के बीच संतुलन को उजागर करता है।
Source: www.thehindu.com