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कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने rss की कानूनी स्थिति पर उठाए सवाल

मुख्य तथ्य कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 13 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने संगठन की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए। खड़गे ने…

मुख्य तथ्य

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 13 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने संगठन की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए। खड़गे ने पूछा, 'यदि नागरिकों, श्रमिकों, एनजीओ, ट्रस्टों, मंदिरों और कंपनियों को पंजीकरण, खुलासा और कानून का पालन करना आवश्यक है, तो RSS को छूट क्यों दी जानी चाहिए?' यह पत्र RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी भेजा गया।

विवरण

खड़गे ने पिछले वर्ष भी RSS की कानूनी स्थिति के बारे में इसी प्रकार के प्रश्न उठाए थे। उन्होंने संगठन के पंजीकरण, संरचना, वित्तपोषण, दान और समग्र कामकाज के बारे में जानकारी मांगी।

कानूनी पृष्ठभूमि

कानूनी सिद्धांतकार जॉन सालमंड के अनुसार, 'व्यक्ति वह है जिसे कानून अधिकारों और कर्तव्यों में सक्षम मानता है।' कानून में 'प्राकृतिक व्यक्ति' और 'कृत्रिम व्यक्ति' दो श्रेणियां हैं। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 9 के तहत एक कंपनी को पंजीकरण के बाद एक कॉर्पोरेट निकाय माना जाता है, जिसमें स्थायी उत्तराधिकार, सामान्य मुहर, संपत्ति रखने और अनुबंध करने की क्षमता होती है।

RSS ने खुद को एक 'स्वैच्छिक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन' बताया है, जिसका उद्देश्य 'हिंदू धर्म की रक्षा करते हुए समाज को संगठित करके राष्ट्र को गौरव के शिखर पर ले जाना' है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(31) 'व्यक्ति' की परिभाषा में 'व्यक्तियों के समूह' को शामिल करती है, चाहे वह पंजीकृत हो या नहीं।

अदालती मामले

22 फरवरी 1994 को पटना उच्च न्यायालय ने RSS को कर छूट दी थी, जिसमें सदस्यों से प्राप्त 'गुरु दक्षिणा' को कर-मुक्त माना गया था। 15 फरवरी 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने RSS को एक अलग पक्ष के रूप में मान्यता दी थी, जब सिंघई लाल चंद जैन ने RSS को पन्ना, मध्य प्रदेश में एक संपत्ति से बेदखल करने का मुकदमा दायर किया था।

प्रभाव

खड़गे के सवालों ने इस बहस को फिर से जीवित कर दिया है कि क्या RSS जैसे बड़े संगठन को बिना औपचारिक पंजीकरण ढांचे के काम करना जारी रखना चाहिए। RSS की वेबसाइट के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना किसी औपचारिकता के शाखा में जाकर स्वयंसेवक बन सकता है। संगठन से जुड़े लगभग 32 सहयोगी संगठन अलग-अलग कानूनों के तहत पंजीकृत हैं, जैसे ABVP सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • RSS की कानूनी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है: यह एक 'व्यक्तियों का समूह' है, न कि एक पंजीकृत कॉर्पोरेट निकाय।
  • कर मामलों और अदालती मुकदमों में इसे एक अलग इकाई के रूप में मान्यता दी गई है।
  • सहयोगी संगठन अलग-अलग कानूनों के तहत पंजीकृत हैं, जो RSS को एक व्यापक नेटवर्क प्रदान करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RSS का कानूनी दर्जा क्या है?

RSS एक स्वैच्छिक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है जो खुद को 'व्यक्तियों का समूह' बताता है। यह किसी विशेष कानून के तहत पंजीकृत नहीं है, लेकिन कर मामलों और अदालती मुकदमों में इसे एक अलग इकाई के रूप में मान्यता दी गई है।

क्या RSS को कर छूट मिली हुई है?

हां, पटना उच्च न्यायालय ने 1994 में RSS को गुरु दक्षिणा के रूप में प्राप्त दान पर कर छूट दी थी, इसे 'बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स' मानते हुए।

RSS से जुड़े संगठन कैसे पंजीकृत हैं?

RSS से जुड़े कई संगठन जैसे ABVP, भारतीय मजदूर संघ आदि अलग-अलग कानूनों जैसे सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत हैं।

प्रियांक खड़गे ने RSS पर क्या सवाल उठाए?

उन्होंने पूछा कि जब नागरिकों, श्रमिकों, एनजीओ, ट्रस्टों और कंपनियों को पंजीकरण और खुलासा करना होता है, तो RSS को छूट क्यों दी जाए?

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