प्रमुख तथ्य
कोयंबटूर की महिला अदालत ने बुधवार (17 जून, 2026) को पोल्लाची निवासी एक व्यक्ति को मानसिक रूप से विकलांग महिला से दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने के मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह घटना 2021 में हुई थी।
मामले का विवरण
न्यायाधीश वी. सुंदरराज ने 44 वर्षीय जी. बालासुब्रमण्यम को यह सजा सुनाई। अभियोजन के अनुसार, बालासुब्रमण्यम अपने इलाके में दीवार पेंटिंग और संबंधित काम करता था। उसने पीड़िता के घर में पेंटिंग का काम करते समय उसके साथ दुष्कर्म किया। यह घटना तब सामने आई जब पीड़िता गर्भवती पाई गई। पीड़िता ने अपनी मां को आपबीती सुनाई, जो उसकी देखभाल कर रही थीं, जिसके बाद पोल्लाची महिला पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
सबूत और सजा
अभियोजक बी. जिशा ने कहा कि डीएनए परीक्षण के माध्यम से आरोपी और भ्रूण के बीच संबंध साबित हुआ। अदालत ने बालासुब्रमण्यम को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(l) (मानसिक या शारीरिक विकलांगता से पीड़ित महिला से दुष्कर्म) और 376(2)(n) (एक ही महिला से बार-बार दुष्कर्म) के तहत दोषी ठहराया। सजा के अलावा, अदालत ने उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मुआवजा और प्रभाव
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को उचित मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया। यह फैसला मानसिक रूप से विकलांग महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में सख्त कार्रवाई का संकेत देता है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
- यह मामला पोल्लाची, तमिलनाडु का है।
- पीड़िता मानसिक रूप से विकलांग थी, जिससे अपराध की गंभीरता बढ़ जाती है।
- डीएनए साक्ष्य ने दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरोपी को कितने साल की सजा हुई?
आरोपी जी. बालासुब्रमण्यम को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
पीड़िता किस श्रेणी की थी?
पीड़िता मानसिक रूप से विकलांग महिला थी।
मुआवजे का आदेश किसे दिया गया?
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया।
स्रोत: www.thehindu.com