मुख्य तथ्य
तमिलनाडु सरकार की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में डीजल और पेट्रोल की खपत पिछले दस वर्षों में लगभग स्थिर बनी हुई है, जबकि वास्तविक सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर लगभग 7% प्रति वर्ष रही है। यह रिपोर्ट 16 जून, 2026 को जारी की गई।
डीजल खपत: स्थिरता का संकेत
डीजल की खपत 2016-17 में 750 करोड़ लीटर थी, जो कोविड-19 महामारी वर्ष 2020-21 में घटकर 564 करोड़ लीटर रह गई। इसके बाद यह धीरे-धीरे बढ़ी और 2025-26 में 770 करोड़ लीटर तक पहुंची। रिपोर्ट में कहा गया है कि "वृद्धि मूलतः निरपेक्ष रूप में स्थिर है।"
पेट्रोल खपत: मामूली वृद्धि
पेट्रोल की खपत 2016-17 में 312 करोड़ लीटर से बढ़कर 2025-26 में 532 करोड़ लीटर हो गई, जो लगभग 6% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्शाती है। हालांकि यह वृद्धि GSDP वृद्धि से कम है।
ठहराव के कारण और भविष्य की चुनौतियां
रिपोर्ट ने "मात्रा ठहराव" के कारणों को संरचनात्मक बताया है, जिसमें बेहतर ईंधन दक्षता, संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग, तथा माल ढुलाई पैटर्न में बदलाव शामिल हैं। दस्तावेज़ में आशंका जताई गई है कि "चल रहे ऊर्जा संक्रमण के साथ, राजस्व के इस स्रोत की प्रवृत्ति और खराब होने की संभावना है।"
FAQ
- तमिलनाडु में डीजल की खपत 2025-26 में कितनी रही? 2025-26 में डीजल की खपत 770 करोड़ लीटर रही, जो 2016-17 के 750 करोड़ लीटर के स्तर पर लगभग स्थिर है।
- पेट्रोल की खपत में कितनी वृद्धि हुई? पेट्रोल की खपत 2016-17 में 312 करोड़ लीटर से बढ़कर 2025-26 में 532 करोड़ लीटर हो गई, जो लगभग 6% CAGR है।
- डीजल-पेट्रोल खपत में ठहराव के क्या कारण हैं? रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर ईंधन दक्षता, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग, और माल ढुलाई पैटर्न में बदलाव प्रमुख कारण हैं।
- इस रुझान का राज्य के राजस्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा? रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा संक्रमण के चलते ईंधन कर से राजस्व में और गिरावट आ सकती है।
स्रोत: www.thehindu.com