मुख्य तथ्य
शिवसेना (UBT) के तीन वरिष्ठ सांसदों – अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत – ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब पार्टी के 6-7 सांसदों के शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) में शामिल होने की अटकलें तेज हैं।
विस्तार से जानकारी
बैठक के बाद अनिल देसाई ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने स्पीकर को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें अवैध दलबदल को रोकने की मांग की गई है। देसाई ने कहा, "कानून के अनुसार, कोई भी दल केवल दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से किसी अन्य पार्टी में विलय नहीं कर सकता। विलय का अधिकार केवल मूल पार्टी को है।" उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर के पास इस मामले में विवेकाधिकार है, और यदि कोई समूह दो-तिहाई बहुमत का दावा करते हुए विलय के लिए आता है, तो उसे मान्यता नहीं दी जा सकती।
प्रभाव और संभावित परिणाम
लोकसभा में शिवसेना के 9 सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों को एक साथ जाना होगा। संजय राउत ने पहले आरोप लगाया था कि कुछ महाराष्ट्र के सांसदों को पक्ष बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये की पेशकश की गई। बुधवार को उन्होंने दावा किया, "मुझे बताया गया कि रेट 50 करोड़ रुपये है और 15 करोड़ रुपये आज रात तक दे दिए जाएंगे। कथित तौर पर वे बिना पैसे लिए विमान में बैठने को तैयार नहीं थे।"
पाठकों को क्या जानना चाहिए
- शिवसेना (UBT) के तीन सांसदों – अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत – ने स्पीकर से मुलाकात की।
- राजाभाऊ वाजे ने उद्धव ठाकरे के प्रति निष्ठा जताई है, जबकि बाकी 6 सांसदों को शिंदे गुट में जाने वाला माना जा रहा है।
- स्पीकर ओम बिरला ने कानून के अनुसार निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिवसेना (UBT) के कितने सांसद बगावत कर सकते हैं?
खबरों के अनुसार, पार्टी के 6-7 सांसद शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी में हैं। लोकसभा में शिवसेना के 9 सांसद हैं, और दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों को एक साथ जाना होगा।
संजय राउत ने सांसदों को पैसे देने का क्या आरोप लगाया?
संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को 50 करोड़ रुपये की पेशकश की गई, जिसमें से 15 करोड़ रुपये उसी रात देने का वादा किया गया। उन्होंने कहा कि सांसद बिना पैसे लिए विमान में बैठने को तैयार नहीं थे।
लोकसभा स्पीकर ने मुलाकात में क्या आश्वासन दिया?
स्पीकर ओम बिरला ने आश्वासन दिया कि वे कानून के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय लेंगे।
स्रोत: www.hindustantimes.com