मुख्य तथ्य
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) ने तिरुपति के प्रसादम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता बेंगलुरु में आयोजित रिसर्च इनोवेशन स्टार्टअप्स एंड एंटरप्रेन्योरशिप (RAISE) सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की उपस्थिति में हुआ।
समझौते का विवरण
MoU पर TTD के महाप्रबंधक (खरीद) उमा शंकर ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत CFTRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक नियमित रूप से TTD सुविधाओं का दौरा करेंगे और खाद्य प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, संरक्षण और वितरण में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
पृष्ठभूमि: घी विवाद
यह समझौता तिरुपति लड्डू में कथित मिलावटी घी के उपयोग के विवाद के बाद हुआ है। पिछले शासनकाल में घी की आपूर्ति में अनियमितताओं की खबरों के बाद TTD ने प्रसादम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक सहयोग का निर्णय लिया।
वैज्ञानिक सहयोग के लाभ
- गुणवत्ता नियंत्रण के लिए सख्त मानक और मॉनिटरिंग तंत्र विकसित किए जाएंगे।
- पैकेजिंग और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए शोध-आधारित हस्तक्षेप किए जाएंगे, जिससे प्रसादम की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक मूल्य बना रहे।
- TTD के खाद्य विश्लेषकों और हैंडलर्स को उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें घी की शुद्धता और सुगंध प्रोफाइलिंग शामिल है।
विशेषज्ञों की राय
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, "वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के माध्यम से विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने से TTD को खाद्य और प्रसादम की गुणवत्ता में उच्चतम मानक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।" TTD के प्रवक्ता ने कहा कि यह MoU देश में मंदिर खाद्य प्रबंधन प्रणालियों के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
TTD और CFTRI के बीच MoU क्यों महत्वपूर्ण है?
यह MoU तिरुपति के प्रसादम की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास है, खासकर घी मिलावट विवाद के बाद।
CFTRI क्या है?
CFTRI (Central Food Technological Research Institute) मैसूर स्थित एक प्रमुख खाद्य अनुसंधान संस्थान है, जो CSIR के अंतर्गत आता है।
इस समझौते से तीर्थयात्रियों को क्या लाभ होगा?
इससे प्रसादम की गुणवत्ता, पोषण मानकों और सुरक्षा में सुधार होगा, साथ ही पैकेजिंग और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने जैसे उपायों से तीर्थयात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
Source: www.hindustantimes.com