मुख्य तथ्य
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 20 TMC विद्रोही सांसदों के NCPI में विलय के मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय लेंगे। सूत्रों के अनुसार, वे पहले TMC नेतृत्व को सुनेंगे।
विवरण
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर विलय को खारिज करने का अनुरोध किया था, क्योंकि टीएमसी एक अविभाज्य राजनीतिक दल है। सोमवार को होने वाली बैठक स्थगित हो गई क्योंकि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसियों के समक्ष पेश थे।
रविवार शाम को 19 टीएमसी सांसदों ने बिरला को विलय का पत्र सौंपा। मलेशिया में मौजूद रचना बनर्जी ने भी सहमति दी, जिससे समूह 20 सांसदों का हो गया।
प्रभाव
विलय से एनडीए की लोकसभा में संख्या 294 से बढ़कर 314 हो जाएगी, जो दो-तिहाई बहुमत से 46 सीटें कम है। राज्यसभा में सत्ता पक्ष 155 सीटों तक पहुंच सकता है, जो दो-तिहाई से केवल 8 सीटें कम है।
पक्षों की प्रतिक्रिया
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि स्पीकर का निष्पक्ष रहना कर्तव्य है। उन्होंने विद्रोहियों के बीच विरोधाभासों की ओर इशारा किया। एक भाजपा सांसद ने कहा कि एनसीपीआई में विलय का निर्णय विद्रोहियों का पश्चिम बंगाल से संबंध बनाए रखने और पूर्वोत्तर को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए लिया गया।
पृष्ठभूमि
टीएमसी में संकट तब शुरू हुआ जब पार्टी पिछले महीने विधानसभा चुनाव में भाजपा से हार गई। बंगाल में 59 विधायकों ने रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया।
FAQ
TMC के कितने विद्रोही सांसद NCPI में विलय चाहते हैं?
20 TMC सांसदों ने NCPI में विलय की इच्छा व्यक्त की है।
क्या विलय को मंजूरी मिलने की संभावना है?
विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, TMC की आपत्तियों के बावजूद विलय के खारिज होने की संभावना कम है।
विलय से NDA को क्या लाभ होगा?
विलय से NDA की लोकसभा में संख्या 294 से बढ़कर 314 हो जाएगी, जो दो-तिहाई बहुमत से 46 सीटें कम है।
Source: www.hindustantimes.com