मुख्य तथ्य
तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुभाष पालेकर ने कहा कि उनकी प्राकृतिक खेती पद्धति से रासायनिक उर्वरकों से खराब हुई मिट्टी को मात्र एक वर्ष में पुनर्जीवित किया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकारों की कृषि नीतियों पर कड़ी आपत्ति जताई और हरित क्रांति को समय की मांग बताते हुए अब पुरानी सोच बदलने पर जोर दिया।
विस्तार से
श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय (एसवीयू) में आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम में 850 से अधिक किसानों ने भाग लिया। पालेकर ने कहा कि हरित क्रांति ने भारत को खाद्य सुरक्षा दी, लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और कृषि की अवधारणा को बदलें। उन्होंने कहा, "अब हालात बदल गए हैं और हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, कृषि की पूरी अवधारणा बदलनी होगी ताकि मिट्टी की सेहत और इस तरह मानव स्वास्थ्य को बहाल किया जा सके।"
सरकारी दावों पर सवाल
पालेकर ने केंद्र और राज्य सरकारों पर जैविक खेती के प्रसार के खोखले दावे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अगर 10 लाख किसान प्राकृतिक या जैविक खेती कर रहे हैं, जैसा कि राज्य सरकार का दावा है, तो यूरिया की कमी को लेकर यह हंगामा क्यों है?" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को उनकी कृषि पद्धति की सही समझ नहीं है। "सुभाष पालेकर कृषि के बारे में उनकी कथित जानकारी मेरे उपदेश और अभ्यास से बिल्कुल अलग है," उन्होंने कहा।
मिट्टी बहाली का समय
जब उनसे पूछा गया कि रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से मिट्टी की सेहत बहाल करने में कितना समय लगेगा, तो उन्होंने कहा, "बस एक साल। हमारी मल्चिंग प्रथाओं द्वारा बनाए गए ह्यूमस से बनने वाले बैक्टीरिया, कवक और प्रोटोजोआ एक साल में रासायनिक अवशेषों को निष्क्रिय कर सकते हैं।"
जागरूकता की कमी
पालेकर ने किसानों को समझाने में कठिनाई का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारी, वैज्ञानिक और मीडिया भी उनकी पद्धति पर विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा, "यह उनके दिमाग में ठोक दिया गया है।" उन्होंने 'अमीर भारत और गरीब भारत' के बीच बढ़ती खाई को महंगे रासायनिक इनपुट और तकनीकी उपकरणों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- सुभाष पालेकर कौन हैं? सुभाष पालेकर एक प्रसिद्ध भारतीय कृषि वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हैं। वे 'सुभाष पालेकर कृषि' नामक प्राकृतिक खेती पद्धति के संस्थापक हैं।
- उनकी प्राकृतिक खेती पद्धति क्या है? यह गाय आधारित प्राकृतिक खेती है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता। मल्चिंग और जैविक सामग्री से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाती है।
- क्या रासायनिक उर्वरकों से खराब मिट्टी ठीक हो सकती है? पालेकर के अनुसार, उनकी विधि से मात्र एक वर्ष में रासायनिक अवशेषों को निष्क्रिय किया जा सकता है और मिट्टी की सेहत बहाल हो सकती है।
- उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार पर क्या आरोप लगाया? उन्होंने कहा कि यदि 10 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं तो यूरिया की कमी का संकट क्यों है। उन्होंने सरकारी दावों को खोखला बताया।
स्रोत: www.thehindu.com