मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कफ सिरप सहित सभी सिरप की बिक्री को डॉक्टर के पर्चे पर अनिवार्य कर दिया है। यह नियम देशभर में लागू होगा और इसका उद्देश्य दवा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
क्या है नया नियम?
ड्रग्स रूल्स, 2026 के तहत किए गए संशोधन में शेड्यूल K की एंट्री नंबर 13 से 'सिरप' शब्द हटा दिया गया है। पहले इस एंट्री के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप को बिना लाइसेंस के बेचने की छूट थी। अब यह छूट खत्म हो गई है।
"अब छोटे गांवों में भी कफ सिरप की बिक्री और वितरण केवल लाइसेंसशुदा फार्मेसियों के माध्यम से ही होगा, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उसके नियमों के अनुरूप होगा।" - स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान
क्यों लाया गया यह बदलाव?
हाल के वर्षों में कई देशों में कफ सिरप से दूषित होने के कारण बच्चों की मौत की खबरों के बाद दवा नियामकों ने सिरप आधारित दवाओं की जांच बढ़ा दी थी। इस संशोधन का उद्देश्य सिरप फॉर्मूलेशन पर नियामकीय निगरानी को मजबूत करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखना है।
उद्योग पर प्रभाव
इस कदम से निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को लाइसेंसिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के सख्त मानकों का पालन करना होगा। मंत्रालय ने कहा कि इससे कफ सिरप के जिम्मेदार वितरण और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित होगा।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
- अब कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य है।
- छोटे गांवों में भी केवल लाइसेंसशुदा फार्मेसी से ही खरीद सकते हैं।
- यह नियम 16 जून 2026 से लागू है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कफ सिरप खरीदने के लिए अब क्या जरूरी है?
अब कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य है। बिना पर्चे के कोई भी फार्मेसी इसे नहीं बेच सकती।
क्या छोटे गांवों में भी यह नियम लागू होगा?
हां, पहले 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप बिना लाइसेंस के बेचा जा सकता था, लेकिन अब वहां भी लाइसेंसशुदा फार्मेसी से ही बिक्री होगी।
यह नियम कब से लागू हुआ?
यह संशोधन 16 जून 2026 को अधिसूचित किया गया और तुरंत प्रभाव से लागू हो गया।
स्रोत: www.hindustantimes.com